‘फायरिंग का आदेश किसने दिया?’ राहुल के सवाल पर सरकार का पलटवार-‘गृह मंत्री जवाब देंगे, आप भागिएगा मत!
संसद में छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। विपक्ष की ओर से राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से सवाल करते हुए पूछा कि जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ कथित फायरिंग का आदेश आखिर किसने दिया। राहुल गांधी का कहना है कि अगर यह आदेश गृह मंत्री की ओर से नहीं दिया गया था, तो गृह मंत्रालय में आखिर किस अधिकारी या व्यक्ति ने ऐसा निर्देश दिया, इसका जवाब देश के सामने आना चाहिए। इस मुद्दे पर राहुल गांधी ने सरकार से छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर माफी मांगने की मांग भी उठाई, जिससे संसद के भीतर राजनीतिक बहस और ज्यादा तीखी हो गई।
राहुल गांधी के सवाल का जवाब देते हुए सरकार की तरफ से कहा गया कि गृह मंत्री अमित शाह संसद में हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं। सरकार का संदेश यह है कि अगर विपक्ष के पास छात्रों पर हुई कार्रवाई को लेकर सवाल हैं, तो उन्हें सदन में चर्चा के दौरान उठाया जाए और सरकार उनका जवाब देने के लिए तैयार है। इसी के साथ सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर यह भी सवाल उठाया कि जब सरकार चर्चा के लिए तैयार है, तो विपक्ष संसद की कार्यवाही को बाधित क्यों कर रहा है। इस पूरे घटनाक्रम ने अब छात्रों के मुद्दे को संसद में सत्ता बनाम विपक्ष की बड़ी राजनीतिक लड़ाई में बदल दिया है।
इस विवाद का सबसे संवेदनशील हिस्सा वही सवाल है जिसे राहुल गांधी ने संसद में उठाया- आखिर कार्रवाई या फायरिंग का आदेश किसने दिया? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यदि किसी प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल का इस्तेमाल हुआ है, तो उसके आदेश, परिस्थितियों और जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है। विपक्ष चाहता है कि सरकार इस पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करे और बताए कि पुलिस कार्रवाई किन परिस्थितियों में हुई। वहीं सरकार का रुख है कि इन सवालों का जवाब संसद के भीतर दिया जा सकता है और गृह मंत्री खुद सदन में अपनी बात रखने के लिए तैयार हैं।
इसी बीच भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही को जानबूझकर बाधित करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विपक्ष का उद्देश्य छात्रों के मुद्दे पर चर्चा करना नहीं, बल्कि किसी भी तरह संसद को चलने से रोकना है। उन्होंने सरकार की ओर से किए गए उन प्रयासों का भी उल्लेख किया, जिनके तहत छात्रों की मांगों पर कार्रवाई करने, सख्त कानून बनाने और मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था करने की बात कही जा रही है। उनका तर्क है कि जब सरकार अपनी ओर से जवाब देने के लिए तैयार है, तो विपक्ष को चर्चा से पीछे नहीं हटना चाहिए।
जगदंबिका पाल के बयान ने राजनीतिक बहस को एक दूसरे मोर्चे पर भी पहुंचा दिया है। सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष छात्रों के मुद्दे को लेकर सरकार से जवाब मांगने की बात तो करता है, लेकिन जब सरकार जवाब देने के लिए तैयार होती है, तब सदन को चलने नहीं दिया जाता। भाजपा का कहना है कि संसद लोकतांत्रिक बहस और जवाबदेही का मंच है और अगर किसी मुद्दे पर गंभीर सवाल हैं तो उन्हें नियमों के तहत सदन में उठाकर सरकार से जवाब मांगा जाना चाहिए। सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया जा रहा है कि चर्चा से पीछे हटने का कोई कारण नहीं है।
वहीं विपक्ष के लिए यह मामला सिर्फ एक सामान्य राजनीतिक मुद्दा नहीं है। राहुल गांधी और विपक्ष के अन्य नेताओं के लिए छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का सवाल सरकार की जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। विपक्ष चाहता है कि कार्रवाई की परिस्थितियों और आदेश देने वाले जिम्मेदार लोगों को लेकर स्पष्टता सामने आए। इसके साथ ही छात्रों के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर सरकार की जिम्मेदारी तय करने और माफी की मांग भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गई है। यही वजह है कि दोनों पक्षों के रुख में फिलहाल नरमी दिखाई नहीं दे रही है।
अब पूरा विवाद संसद के अगले घटनाक्रम पर टिक गया है। अगर गृह मंत्री अमित शाह वास्तव में सदन में इस मामले पर विस्तृत जवाब देते हैं, तो विपक्ष के पास अपने सवाल सीधे सरकार के सामने रखने का मौका होगा। इसके बाद यह देखना अहम होगा कि सरकार का जवाब विपक्ष को संतुष्ट करता है या फिर नए सवाल खड़े करता है। दूसरी ओर अगर संसद में चर्चा के बजाय हंगामा और कार्यवाही बाधित होने का सिलसिला जारी रहता है, तो सत्ता पक्ष के उस आरोप को और बल मिलेगा कि विपक्ष चर्चा से बच रहा है।
फिलहाल संसद में तस्वीर बेहद साफ है- विपक्ष पूछ रहा है, ‘आदेश किसने दिया?’ और सरकार कह रही है, ‘गृह मंत्री जवाब देने के लिए तैयार हैं।’ अब असली परीक्षा इस बात की है कि क्या दोनों पक्ष इस टकराव से आगे बढ़कर संसद में आमने-सामने बैठकर पूरे मामले पर चर्चा करेंगे। छात्रों के आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने जैसे सवालों का जवाब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि तथ्य और आधिकारिक जवाब के जरिए सामने आना जरूरी है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद की कार्यवाही के साथ-साथ देश की राजनीतिक बहस का भी बड़ा केंद्र बना रह सकता है।
written by:- Anjali Mishra
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