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सत्ता का संग्राम (Politics)

“संविधान हमारी संजीवनी है, लेकिन कुछ दलों को अब भी नहीं स्वीकार डॉ. आंबेडकर की सोच: अखिलेश यादव”

आंबेडकर जयंती के अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रविवार को राजधानी लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए संविधान, सामाजिक न्याय और मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर अपने विचार साझा किए।

अखिलेश यादव ने कहा, “बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने जीवन भर सामाजिक भेदभाव, विषमता और अन्याय के खिलाफ संघर्ष किया। बचपन से ही उन्हें जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने शिक्षा और संघर्ष के बल पर न केवल खुद को स्थापित किया, बल्कि करोड़ों लोगों को अधिकारों की लड़ाई लड़ने का रास्ता दिखाया।”

“संविधान ही हमारा रक्षक है”
सपा प्रमुख ने कहा कि देश का संविधान सिर्फ एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन की संजीवनी है। यही संविधान समाज के निचले और वंचित तबके के अधिकारों की रक्षा करता है। उन्होंने कहा, “बाबा साहब का बनाया हुआ संविधान ही वह औज़ार है जिससे हम न्याय, समानता और स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ते हैं।”

“संविधान को कमजोर करने की साज़िशें हो रही हैं”
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि आज भी देश में कुछ शक्तियाँ ऐसी हैं जो बाबा साहब की विचारधारा को स्वीकार नहीं कर पाईं हैं। “प्रदेश के कई हिस्सों में आज भी डॉ. आंबेडकर की मूर्तियों को तोड़ा जाता है। यह सिर्फ मूर्ति नहीं तोड़ी जाती, बल्कि यह सोच पर हमला है, जो समानता और न्याय की बात करती है,” उन्होंने कहा।

उन्होंने आगे कहा, “कुछ राजनीतिक दल और ताकतें जानबूझकर संविधान को कमजोर करने की दिशा में काम कर रही हैं। ये लोग सामाजिक न्याय की आवाज़ को दबाना चाहते हैं, लेकिन समाजवादी विचारधारा ऐसे किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देगी।”

“युवाओं को बाबा साहब के विचारों से जोड़ना ज़रूरी”
अखिलेश यादव ने इस अवसर पर युवाओं से आह्वान किया कि वे डॉ. आंबेडकर के विचारों को पढ़ें और समझें। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब असमानता और सामाजिक तनाव बढ़ रहा है, तब बाबा साहब की शिक्षाएं पहले से कहीं ज़्यादा प्रासंगिक हो गई हैं।

समाजवादी पार्टी की ओर से राज्य भर में कार्यक्रम
आंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में समाजवादी पार्टी की ओर से पूरे उत्तर प्रदेश में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों में डॉ. आंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास किया गया और संविधान की मूल भावना को बचाने का संकल्प लिया गया।

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