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15 मौतें, सिस्टम पर सवाल और CM का एक्शन! अलीगंज अग्निकांड ने हिला दी यूपी की पूरी व्यवस्था |

लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण कोचिंग अग्निकांड ने सिर्फ 15 परिवारों के चिराग ही नहीं बुझाए, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक, सुरक्षा और नियामक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार एक्शन मोड में दिखाई दे रहे हैं। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब सुरक्षा मानकों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में बड़ा फैसला लेते हुए बेसमेंट में कोचिंग सेंटर चलाने पर रोक लगा दी गई है। इतना ही नहीं, बेसमेंट में किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया गया है। सरकार का मानना है कि आपातकालीन परिस्थितियों में बेसमेंट सबसे अधिक खतरनाक साबित होता है और लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है।

इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू उन परिवारों की कहानियां हैं जिन्होंने अपने बच्चों को खो दिया। हरियाणा के सोनीपत के महिपुर गांव निवासी भविष्य की आखिरी वीडियो कॉल ने पूरे देश को भावुक कर दिया। नौकरी की तलाश में लखनऊ आए भविष्य ने आग में फंसने के बाद अपनी मां को वीडियो कॉल किया था। चारों तरफ धुएं से घिरे भविष्य ने कांपती आवाज में कहा था, “चारों तरफ धुआं ही धुआं है… शायद मैं अब जिंदा नहीं बच पाऊंगा।” एक मां लगातार बेटे को हिम्मत देती रही, लेकिन कुछ देर बाद कॉल कट गई और फिर वह आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई। आज वह वीडियो कॉल एक परिवार की सबसे दर्दनाक याद बन चुकी है।

हादसे के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष इस त्रासदी पर राजनीति कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि जिस इमारत में हादसा हुआ, उसका प्लॉट आवंटन, निर्माण और उससे जुड़े कई फैसले पूर्ववर्ती सरकार के समय हुए थे। उनका आरोप है कि अवैध निर्माण को लेकर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई और यही लापरवाही आज इतनी बड़ी त्रासदी का कारण बनी।

लेकिन दूसरी तरफ विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। सबसे बड़ा विवाद उस जांच समिति को लेकर सामने आया है जिसके अध्यक्ष के रूप में उसी व्यवस्था से जुड़े अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है, जिनके विभाग पर निगरानी और प्रवर्तन की जिम्मेदारी होने की बात कही जा रही है। आलोचकों का कहना है कि यदि जांच उसी सिस्टम के हाथ में होगी जिस पर सवाल उठ रहे हैं, तो निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा होना स्वाभाविक है। लोगों की मांग है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो और जिम्मेदारी केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित न रहे।

इस भयावह घटना के बीच इंसानियत की एक मिसाल भी सामने आई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार उत्तर प्रदेश की राज्यपाल के पीएसओ के रूप में तैनात एक जवान मौके से गुजर रहा था। आग और अफरा-तफरी का मंजर देखकर वह बिना किसी आदेश का इंतजार किए सीधे राहत कार्य में जुट गया। बताया जा रहा है कि उसने अपनी जान जोखिम में डालकर करीब छह लोगों को बाहर निकालने में मदद की। जब कई लोग मोबाइल से वीडियो बना रहे थे, तब यह जवान लोगों की जान बचाने में लगा था। सोशल मीडिया पर लोग उसे “असली हीरो” और “फरिश्ता” कहकर सम्मान दे रहे हैं।

इसी बीच निलंबित फायर अधिकारी कमलेंद्र सिंह का पत्र भी चर्चा में है। उन्होंने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में दावा किया है कि उनका कार्य केवल निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार करने तक सीमित था। उनके अनुसार फायर एनओसी जारी करने और अंतिम अनुमति देने का अधिकार वरिष्ठ अधिकारियों के पास था। उन्होंने अपने निलंबन को अन्यायपूर्ण बताते हुए सवाल उठाया है कि क्या कार्रवाई केवल निचले स्तर के अधिकारियों तक सीमित रहेगी या फिर जिम्मेदारी तय करने का दायरा ऊपर तक जाएगा। इस पत्र ने जवाबदेही की बहस को और तेज कर दिया है।

अलीगंज हादसे के बाद सरकार ने पूरे प्रदेश में कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों की जांच शुरू कर दी है। इसी अभियान के तहत प्रयागराज में चर्चित शिक्षक Khan Sir की कोचिंग शाखा पर भी कार्रवाई हुई। प्रयागराज विकास प्राधिकरण की टीम ने संस्थान की जांच के बाद छात्रों को बाहर निकालकर भवन को सील कर दिया। प्रशासन का संदेश साफ है कि चाहे संस्थान कितना भी बड़ा नाम क्यों न हो, सुरक्षा नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस बीच प्रदेश शोक में डूबा हुआ है, लेकिन मुजफ्फरनगर में पूर्व मंत्री संजीव बालियान के जन्मदिन समारोह को लेकर भी बहस छिड़ गई है। हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद जहां कई राजनीतिक कार्यक्रमों में सादगी दिखाई गई, वहीं जन्मदिन समारोह में भीड़, होर्डिंग, ढोल-डीजे और शक्ति प्रदर्शन की तस्वीरों ने संवेदनशीलता को लेकर सवाल खड़े कर दिए। आलोचकों का कहना है कि जब पूरा प्रदेश एक त्रासदी से गुजर रहा हो, तब ऐसे आयोजनों का संदेश जनता के बीच अच्छा नहीं जाता।

अलीगंज अग्निकांड अब केवल एक दुर्घटना नहीं रह गया है। यह मामला अवैध निर्माण, फायर सेफ्टी, प्रशासनिक जवाबदेही, राजनीतिक संवेदनशीलता और राहत-बचाव व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आईना बन गया है। अब लोगों की नजर जांच पर है। सवाल यही है कि क्या इस बार केवल कुछ कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी या फिर उन सभी लोगों की जिम्मेदारी तय की जाएगी जिनकी लापरवाही ने 15 परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। उत्तर प्रदेश की जनता अब जवाब चाहती है और यह देखना बाकी है कि जांच आखिर किस निष्कर्ष तक पहुंचती है।

written by :- Anjali Mishra

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