पुतिन को भारतीय पूर्व CJI पर भरोसा! रूस-यूक्रेन के अरबों डॉलर के विवाद में डीवाई चंद्रचूड़ की अहम भूमिका
रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव और लंबे संघर्ष के बीच भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवाद में भूमिका मिलना बड़ी खबर मानी जा रही है। रूस ने उन्हें यूक्रेन से जुड़े एक अरबों डॉलर के विवाद की सुनवाई करने वाले अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पैनल में अपनी ओर से arbitrator यानी मध्यस्थ न्यायाधीश नियुक्त किया है। यह नियुक्ति इसलिए खास है क्योंकि दो ऐसे देशों से जुड़ा मामला है, जो लंबे समय से युद्ध और गंभीर राजनीतिक तनाव के दौर से गुजर रहे हैं।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। डीवाई चंद्रचूड़ को रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म कराने या राजनीतिक शांति समझौता कराने की जिम्मेदारी नहीं दी गई है। उनकी भूमिका एक विशेष कानूनी और वित्तीय विवाद से जुड़ी है। रिपोर्टों के अनुसार यह मामला यूक्रेन के सरकारी बैंक Oschadbank और रूस के बीच निवेश संधि से जुड़े विवाद का है, जिसमें अरबों डॉलर के मुआवजे और संपत्तियों को लेकर कानूनी लड़ाई चल रही है।
इस विवाद की पृष्ठभूमि काफी जटिल है। मामला उन परिसंपत्तियों और निवेशों से जुड़ा है, जिन पर रूस और यूक्रेन के बीच नियंत्रण को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। यूक्रेनी पक्ष ने अपनी संपत्तियों को हुए नुकसान के लिए रूस से भारी मुआवजे की मांग की थी। अब यह मामला अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है, जहां दोनों पक्ष अपनी-अपनी कानूनी दलीलें और दस्तावेज पेश करेंगे।
इसी प्रक्रिया में रूस ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को अपनी ओर से arbitrator नियुक्त किया है। आमतौर पर ऐसे अंतरराष्ट्रीय विवादों की सुनवाई एक बहुसदस्यीय ट्रिब्यूनल करता है, जिसमें दोनों पक्ष अपने-अपने arbitrator चुन सकते हैं और फिर निर्धारित प्रक्रिया के तहत मामले की सुनवाई होती है। ऐसे में चंद्रचूड़ की भूमिका किसी एक पक्ष के राजनीतिक प्रतिनिधि की नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के तहत विवाद की सुनवाई करने वाले न्यायिक पैनल के सदस्य की होगी।
यह नियुक्ति डीवाई चंद्रचूड़ के लंबे न्यायिक अनुभव को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लेकर आई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश रहने से पहले उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश और इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी सेवाएं दीं। अपने न्यायिक करियर के दौरान वे कई महत्वपूर्ण संवैधानिक, सामाजिक और कानूनी मामलों से जुड़े रहे। ऐसे में एक जटिल अंतरराष्ट्रीय निवेश और वित्तीय विवाद में उनकी नियुक्ति को उनके कानूनी अनुभव के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस पूरे मामले की सबसे दिलचस्प बात यह है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध भले ही राजनीतिक और सैन्य स्तर पर जारी रहा हो, लेकिन दोनों देशों से जुड़े कानूनी और वित्तीय विवाद अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और मध्यस्थता मंचों पर अपनी अलग प्रक्रिया के तहत चलते हैं। अदालतों और अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल की कार्यवाही युद्ध के मैदान से अलग नियमों और कानूनी ढांचे के आधार पर संचालित होती है। इसलिए यह मामला कूटनीति से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय कानून, निवेश समझौतों और वित्तीय दावों से जुड़ा हुआ है।
डीवाई चंद्रचूड़ के सामने चुनौती भी आसान नहीं होगी। ऐसे मामलों में सिर्फ कानून की व्याख्या ही नहीं, बल्कि निवेश समझौतों, संपत्ति अधिकारों, अंतरराष्ट्रीय संधियों और मुआवजे से जुड़े जटिल सवालों पर भी विचार करना पड़ता है। दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक तनाव बेहद गहरा होने के कारण इस कानूनी विवाद पर दुनिया की नजर रहना स्वाभाविक है। ट्रिब्यूनल को उपलब्ध दस्तावेजों, कानूनी तर्कों और अंतरराष्ट्रीय नियमों के आधार पर मामले की दिशा तय करनी होगी।
इस नियुक्ति को भारत के लिए भी एक दिलचस्प घटनाक्रम के रूप में देखा जा सकता है। भारत लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संवाद, कूटनीति और कानून आधारित समाधान की बात करता रहा है। ऐसे समय में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश का एक बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद के निपटारे की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बनना देश की न्यायिक विशेषज्ञता को भी वैश्विक चर्चा में लाता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस मध्यस्थता प्रक्रिया के जरिए रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा यह अरबों डॉलर का विवाद किसी समाधान तक पहुंच पाएगा? इसका जवाब तुरंत नहीं मिलेगा, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की प्रक्रिया अक्सर लंबी और जटिल होती है। दोनों पक्ष अपने कानूनी तर्क रखेंगे और ट्रिब्यूनल को हर दावे तथा साक्ष्य की विस्तार से जांच करनी होगी।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि यह मामला केवल रूस और यूक्रेन के बीच वित्तीय विवाद नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून की एक बड़ी परीक्षा भी है। पुतिन के नेतृत्व वाले रूस द्वारा पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को arbitrator के रूप में चुना जाना इस पूरे घटनाक्रम को भारत के लिए खास बनाता है। अब दुनिया की नजर इस बात पर होगी कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या चंद्रचूड़ जिस ट्रिब्यूनल का हिस्सा हैं, वह इस अरबों डॉलर के विवाद पर कोई निर्णायक समाधान निकाल पाता है।
written by :- sherry akash
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