रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़ा दांव! जेलेंस्की ने रखा अस्थायी हवाई युद्धविराम का प्रस्ताव |
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच शांति की दिशा में एक नया कदम सामने आया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी दूतों की मॉस्को और कीव यात्रा के दौरान अस्थायी हवाई युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है। जेलेंस्की ने कहा कि इस अवधि में यूक्रेन अपनी तरफ से हवाई हमले नहीं करेगा और रूस से भी इसी तरह हमले रोकने की अपील की है।
इस प्रस्ताव का समय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि अमेरिका की ओर से स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देशों की यात्रा कर रहे हैं। पहले उनका मॉस्को दौरा और उसके बाद कीव जाने का कार्यक्रम है।
जेलेंस्की का कहना है कि बातचीत के दौरान हवाई हमलों पर अस्थायी रोक से वार्ता के लिए बेहतर माहौल बनाया जा सकता है। यूक्रेन अपनी ओर से हमले रोकने को तैयार है, लेकिन इसके साथ वह रूस से भी पारस्परिक रूप से हमले रोकने की उम्मीद कर रहा है।
हालांकि, इस प्रस्ताव के सामने सबसे बड़ी चुनौती रूस का रुख है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, 5 सितंबर को रूस ने यूक्रेन के कई इलाकों पर हमले किए, यानी प्रस्तावित हवाई विराम को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट पारस्परिक सहमति नजर नहीं आई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब युद्ध में हवाई हमलों की तीव्रता बनी हुई है। हाल ही में कीव में यूक्रेन की SBU सुरक्षा सेवा के मुख्यालय पर रूसी ड्रोन हमला भी हुआ था, जिसमें लोगों के घायल होने की खबर सामने आई।
फिर भी जेलेंस्की का यह प्रस्ताव इसलिए अहम है क्योंकि लंबे समय से चल रहे युद्ध में सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक रास्ते तलाशने की कोशिश भी जारी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी हाल में युद्ध खत्म करने के लिए समझौते की संभावना होने की बात कही थी, हालांकि दोनों पक्षों के बीच ठोस प्रगति अभी स्पष्ट नहीं है।
अब असली परीक्षा रूस के जवाब की है। अगर मॉस्को भी अमेरिकी दूतों की मौजूदगी के दौरान हवाई हमलों पर अस्थायी रोक के लिए तैयार होता है, तो यह आगे की बातचीत के लिए एक अहम मौका बन सकता है। लेकिन अगर हमले जारी रहते हैं, तो प्रस्ताव का असर सीमित रह सकता है।
यानी जेलेंस्की ने बातचीत के लिए आसमान में कुछ समय के लिए शांति का प्रस्ताव तो रख दिया है, लेकिन इस प्रस्ताव की सफलता रूस की सहमति पर काफी हद तक निर्भर करेगी। अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या मॉस्को भी हमले रोककर शांति वार्ता के लिए रास्ता खोलेगा, या युद्ध की आग फिर कूटनीति पर भारी पड़ेगी?
written by:- Anjali Mishra
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