जयपुर निगम चुनाव में BJP का बड़ा दांव! 8 मुस्लिम उम्मीदवार, 51 महिला टिकटों से बदले समीकरण |
जयपुर नगर निगम चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपनी उम्मीदवार सूची के जरिए बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। पार्टी ने 150 सीटों में से 51 टिकट महिलाओं को दिए हैं, यानी करीब 35 फीसदी सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारा गया है। इसके साथ ही बीजेपी ने 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को भी टिकट देकर सामाजिक प्रतिनिधित्व और अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने की रणनीति दिखाई है। माना जा रहा है कि पार्टी की यह रणनीति चुनावी मुकाबले में नए सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश है।
बीजेपी की सूची में महिलाओं को दिया गया प्रतिनिधित्व खास तौर पर चर्चा में है। 150 में 51 टिकट महिलाओं को मिलने से पार्टी ने करीब एक-तिहाई सीटों पर महिला उम्मीदवारों को मौका दिया है। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी महिला वोटर्स के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर महिला नेतृत्व को भी चुनावी मैदान में आगे बढ़ाना चाहती है। अब इन उम्मीदवारों का प्रदर्शन चुनावी नतीजों पर कितना असर डालता है, यह देखने वाली बात होगी।
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने अपनी रणनीति में संगठन और पुराने राजनीतिक चेहरों पर भरोसा जताया है। पार्टी की सूची में संगठन से जुड़े कई पदाधिकारी और मौजूदा पार्षद शामिल हैं। कांग्रेस के टिकटों में 4 ब्लॉक अध्यक्ष, 2 PCC प्रकोष्ठ प्रमुख और एक PCC सचिव को जगह मिली है। यानी पार्टी ने स्थानीय संगठन में सक्रिय नेताओं और अपने जमीनी नेटवर्क को चुनावी मैदान में उतारने पर जोर दिया है।
बीजेपी और कांग्रेस की उम्मीदवार चयन की रणनीति में यही सबसे बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। बीजेपी जहां सामाजिक प्रतिनिधित्व, महिला उम्मीदवारों और नए समीकरणों पर जोर देती नजर आ रही है, वहीं कांग्रेस संगठन से जुड़े अनुभवी चेहरों और मौजूदा पार्षदों के अनुभव को चुनावी हथियार बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में मुकाबला सिर्फ पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि दो अलग-अलग चुनावी रणनीतियों के बीच भी दिखाई दे रहा है।
जयपुर जैसे बड़े शहर में नगर निगम चुनाव का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि स्थानीय निकाय चुनाव सीधे तौर पर शहर के विकास, सफाई, सड़क, पानी, ट्रैफिक और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर असर डालते हैं। ऐसे में उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़, वार्ड में उनकी सक्रियता और मतदाताओं के साथ उनका संपर्क नतीजों में अहम भूमिका निभा सकता है।
बीजेपी की ओर से 8 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया जाना भी चुनावी चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। यह कदम पार्टी की ओर से मुस्लिम मतदाताओं और अल्पसंख्यक बहुल इलाकों में राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि इसका वास्तविक चुनावी असर मतदान के दौरान ही साफ होगा।
वहीं कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती अपने संगठनात्मक चेहरों को जीत दिलाने की होगी। ब्लॉक अध्यक्षों, PCC पदाधिकारियों और मौजूदा पार्षदों को टिकट देकर पार्टी ने जिन नेताओं पर भरोसा जताया है, अब उनकी स्थानीय लोकप्रियता और संगठन को वोट में बदलने की क्षमता की परीक्षा होगी।
कुल मिलाकर, जयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी की उम्मीदवार सूची ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। एक तरफ बीजेपी सामाजिक और महिला प्रतिनिधित्व के जरिए नए समीकरण साधने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस अपने संगठन और अनुभवी स्थानीय चेहरों के सहारे मैदान में है। अब असली सवाल यही है क्या बीजेपी का सामाजिक समीकरण वाला दांव कांग्रेस के संगठनात्मक अनुभव पर भारी पड़ेगा?
written by:- Anjali Mishra
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