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PM CARES में 8,500 करोड़ पड़े हैं… तो बच्चों के लिए 1,000 हाईटेक स्कूल क्यों नहीं?

देश की शिक्षा व्यवस्था और सरकारी फंड के इस्तेमाल को लेकर एक नया सवाल सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन सकता है। काकरोच जनता पार्टी यानी CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है कि जब PM CARES फंड में कथित तौर पर करीब 8,500 करोड़ रुपये मौजूद हैं, तो इन संसाधनों का इस्तेमाल बच्चों के लिए आधुनिक और उच्चस्तरीय स्कूल बनाने में क्यों नहीं किया जा रहा?

दीपके का दावा है कि इतनी बड़ी रकम से देश के अलग-अलग हिस्सों में कम से कम 1,000 हाईटेक स्कूल विकसित किए जा सकते हैं। उनका तर्क है कि अगर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी, खेल सुविधाएं और बेहतर शिक्षण संसाधनों वाले स्कूल बनाए जाएं, तो इसका सीधा फायदा लाखों बच्चों को मिल सकता है।

उनका सवाल सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं का भी है। दीपके पूछ रहे हैं कि देश में जब सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने, शिक्षकों की कमी दूर करने और बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने की जरूरत लगातार महसूस की जाती है, तो उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर क्यों नहीं किया जा रहा?

हालांकि यहां यह बात भी महत्वपूर्ण है कि PM CARES फंड की राशि, उसके उपयोग और किसी विशेष क्षेत्र में खर्च को लेकर आधिकारिक रिकॉर्ड और नियमों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है। इसलिए 8,500 करोड़ रुपये की राशि और उससे 1,000 स्कूल बनाए जाने का अनुमान अभिजीत दीपके के दावे और उनके तर्क के रूप में देखा जाना चाहिए।

लेकिन दीपके के वीडियो ने एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है अगर देश के पास बड़े संसाधन मौजूद हैं, तो क्या उनका एक बड़ा हिस्सा भविष्य की पीढ़ी पर निवेश नहीं होना चाहिए? आखिर आज भी कई सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां पर्याप्त क्लासरूम, आधुनिक लैब, डिजिटल सुविधाएं या अन्य बुनियादी संसाधनों की कमी की बात सामने आती रहती है।

आज के दौर में शिक्षा सिर्फ किताब और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रह गई है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी, कोडिंग और आधुनिक विज्ञान तेजी से भविष्य की जरूरत बन रहे हैं। ऐसे में अगर बच्चों को शुरुआत से ही बेहतर तकनीकी और शैक्षणिक सुविधाएं मिलें, तो सरकारी और निजी स्कूलों के बीच मौजूद संसाधनों की खाई को कम करने में मदद मिल सकती है।

दीपके का कहना है कि सरकार को सिर्फ नई योजनाओं और बड़े दावों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मौजूदा संसाधनों का इस्तेमाल वहां करना चाहिए जहां उसका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़े। उनके मुताबिक शिक्षा में निवेश का मतलब सिर्फ इमारतें बनाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को बेहतर अवसर देना है।

अब सोशल मीडिया पर बहस इस बात को लेकर तेज हो सकती है कि PM CARES जैसे फंड का इस्तेमाल किन प्राथमिकताओं के लिए होना चाहिए? क्या आधुनिक स्कूलों का निर्माण इस तरह के संसाधनों के उपयोग का एक बेहतर विकल्प हो सकता है? या सरकार के पास फंड के इस्तेमाल को लेकर पहले से तय उद्देश्य और योजनाएं हैं?

फिलहाल अभिजीत दीपके का वीडियो एक सीधा सवाल छोड़ता है “अगर हजारों करोड़ रुपये उपलब्ध हैं, तो क्या देश के बच्चों को विश्वस्तरीय स्कूल देने की योजना नहीं बननी चाहिए?”

अब सवाल सरकार के सामने है और बहस जनता के बीच हजारों करोड़ का फंड आखिर भविष्य की किस तस्वीर को मजबूत करेगा?

written by:- Anjali Mishra

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