Friday, September 11, 2026 27.4° Lucknow

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

LiveNewsX

ताज़ा खबरें, हर पल की जानकारी

सेहत का सीक्रेट (Health)स्टाइल वाली बात (Lifestyle)

सिगरेट नहीं पीते फिर भी खतरे में हैं? 10-12 घंटे कुर्सी पर बैठना शरीर को अंदर से कर सकता है कमजोर!

हम अक्सर सोचते हैं कि जो लोग सिगरेट पीते हैं, शराब का सेवन करते हैं या अपनी सेहत का ध्यान नहीं रखते, वही गंभीर बीमारियों के खतरे में होते हैं। लेकिन आज की डिजिटल लाइफस्टाइल ने एक ऐसा खतरा पैदा कर दिया है, जिसे बहुत से लोग बीमारी मानते ही नहीं—घंटों तक लगातार बैठे रहना और शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना। सुबह ऑफिस की कुर्सी, वहां से कैब या कार की सीट, फिर घर पर सोफा और उसके बाद घंटों मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन… यानी दिन का बड़ा हिस्सा शरीर लगभग बिना किसी हलचल के गुजार देता है।

मानव शरीर मूल रूप से चलने-फिरने, काम करने और शारीरिक गतिविधि के लिए बना है। लेकिन आधुनिक जीवनशैली में हमारी रोजमर्रा की गतिविधियां लगातार कम होती जा रही हैं। ऑफिस में कई घंटे कुर्सी पर बैठना, ऑनलाइन काम करना, लिफ्ट का इस्तेमाल करना, छोटी दूरी के लिए भी वाहन लेना और खाली समय में स्क्रीन के सामने बैठे रहना धीरे-धीरे हमारी रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधि को कम कर रहा है। समस्या यह है कि इसका नुकसान हमेशा तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन लंबे समय में शरीर पर इसका असर जमा होता रहता है।

शारीरिक निष्क्रियता यानी Physical Inactivity को विश्व स्वास्थ्य संगठन भी एक महत्वपूर्ण वैश्विक स्वास्थ्य जोखिम मानता है। लंबे समय तक कम शारीरिक गतिविधि रहने से हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है कि निष्क्रियता और धूम्रपान को बिल्कुल समान बताना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। दोनों के जोखिम अलग हैं, लेकिन लंबे समय तक शारीरिक निष्क्रियता निश्चित रूप से ऐसी आदत है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

जब हम लगातार कई घंटे बैठे रहते हैं, तो शरीर की बड़ी मांसपेशियां बहुत कम सक्रिय रहती हैं। इससे ऊर्जा का इस्तेमाल कम होता है और लंबे समय तक ऐसी दिनचर्या रहने पर मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लंबे समय तक बैठे रहने और कम गतिविधि वाली जीवनशैली को खराब रक्त शर्करा नियंत्रण, वजन बढ़ने और हृदय संबंधी जोखिमों से जोड़ा गया है। यानी समस्या सिर्फ यह नहीं कि आप जिम जाते हैं या नहीं, बल्कि यह भी है कि आप पूरे दिन में कितनी देर सक्रिय रहते हैं।

अब सबसे बड़ी गलतफहमी यहां पैदा होती है। बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर वे दिनभर ऑफिस में 8-10 घंटे बैठे रहते हैं और शाम को एक घंटे जिम कर लेते हैं, तो उनकी पूरी निष्क्रिय जीवनशैली की भरपाई हो जाएगी। लेकिन शरीर के लिए पूरे दिन की गतिविधि का पैटर्न भी महत्वपूर्ण है। एक घंटे का वर्कआउट निश्चित रूप से फायदेमंद है, लेकिन बाकी 10-12 घंटे लगातार बैठे रहना आदर्श स्थिति नहीं है। इसलिए फिटनेस का मतलब सिर्फ जिम में पसीना बहाना नहीं, बल्कि पूरे दिन छोटे-छोटे अंतराल में शरीर को सक्रिय रखना भी है।

यही वजह है कि विशेषज्ञ लंबे समय तक लगातार बैठने के बीच समय-समय पर उठने, थोड़ा चलने, सीढ़ियों का इस्तेमाल करने और रोजमर्रा की गतिविधियों को बढ़ाने की सलाह देते हैं। ऑफिस में लगातार कई घंटे कुर्सी पर बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर कुछ मिनट चलना, फोन पर बात करते समय खड़े होना या छोटी दूरी के लिए पैदल जाना जैसी आदतें आपकी कुल शारीरिक गतिविधि बढ़ा सकती हैं। ये छोटे कदम मामूली लग सकते हैं, लेकिन पूरे दिन में इनका असर काफी महत्वपूर्ण हो सकता है।

लंबे समय तक निष्क्रिय रहने का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता। लगातार स्क्रीन के सामने बैठना, काम का दबाव और शारीरिक गतिविधि की कमी मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकती है। जब हमारा पूरा दिन काम, मोबाइल और स्क्रीन के बीच गुजरता है और शरीर को पर्याप्त मूवमेंट नहीं मिलता, तो तनाव और थकान बढ़ सकती है। इसलिए शरीर को चलाना सिर्फ मांसपेशियों और वजन के लिए जरूरी नहीं, बल्कि मानसिक ताजगी और रोजमर्रा की ऊर्जा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको तुरंत घंटों जिम में बिताने की जरूरत है। असली बदलाव आपकी रोजमर्रा की आदतों से शुरू हो सकता है। हर घंटे थोड़ी देर उठना, पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना, घर के काम करना, नियमित एक्सरसाइज करना और लंबे समय तक लगातार बैठने से बचना—ये सभी मिलकर एक ज्यादा सक्रिय जीवनशैली बनाने में मदद कर सकते हैं।

तो अगली बार जब आप खुद से कहें कि “मैं धूम्रपान नहीं करता, मैं शराब नहीं पीता, इसलिए मैं पूरी तरह फिट हूं”, तो अपनी दिनचर्या पर भी एक नजर डालिए। सवाल यह भी पूछिए कि आप पूरे दिन में कितने घंटे चलते हैं और कितने घंटे बैठे रहते हैं। क्योंकि आधुनिक दौर में खतरा हमेशा किसी बोतल या सिगरेट के पैकेट में नहीं छिपा होता—कभी-कभी वह हमारी कुर्सी पर लगातार बैठे रहने की आदत में भी छिपा हो सकता है।

याद रखिए—एक घंटे की एक्सरसाइज अच्छी शुरुआत है, लेकिन पूरे दिन की हलचल उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। शरीर को सिर्फ वर्कआउट नहीं, मूवमेंट चाहिए। इसलिए कुर्सी से उठिए, कुछ कदम चलिए, स्क्रीन से ब्रेक लीजिए और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में थोड़ी ज्यादा हलचल शामिल कीजिए। यही छोटी आदतें लंबे समय में आपकी सेहत के लिए बड़ा फर्क पैदा कर सकती हैं।

written by :- sherry akash

( देश और दुनिया की खबरों के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, आप हमें ट्विटर पर भी फॉलो कर सकते हैं. )

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *