80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से पहली बार गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’!
इस बार 15 अगस्त का स्वतंत्रता दिवस समारोह लाल किले की प्राचीर से एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बनने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 2026 में पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा। इस साल भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा और इसी मौके पर ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का भी स्मरण किया जा रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले पहुंचने पर ‘वंदे मातरम्’ का गायन होगा, इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे और राष्ट्र को अपना संबोधन देंगे।
‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से गहराई से जुड़ा हुआ गीत है। आजादी की लड़ाई के दौरान इस गीत ने लोगों में राष्ट्रीय भावना और एकजुटता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यही वजह है कि लाल किले जैसे ऐतिहासिक स्थल से इसके गायन को केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत को याद करने के प्रतीक के रूप में भी पेश किया जा रहा है। इस बार जब लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया जाएगा और उसके साथ ‘वंदे मातरम्’ की गूंज सुनाई देगी, तो स्वतंत्रता दिवस समारोह का दृश्य निश्चित तौर पर अलग नजर आएगा।
इस साल के समारोह की खास बात सिर्फ ‘वंदे मातरम्’ ही नहीं है। रक्षा मंत्रालय ने 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह की थीम में ‘Yuva Shakti for Viksit Bharat@2047’ को भी प्रमुख स्थान दिया है। यानी इस बार समारोह में भारत की युवा शक्ति और देश के भविष्य में युवाओं की भूमिका पर भी विशेष जोर रहेगा। अंतरराष्ट्रीय भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और गणित ओलंपियाड में पदक जीतने वाले 19 छात्र-छात्राओं को भी समारोह में आमंत्रित किया गया है।
लाल किले के सामने ज्ञानपथ पर करीब 2,500 NCC कैडेट और My Bharat स्वयंसेवक ‘वंदे मातरम्’ की आकृति बनाएंगे। इसके अलावा भारतीय वायुसेना का Mi-17 हेलीकॉप्टर ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने की स्मृति वाला बैनर लेकर उड़ान भरेगा और लाल किले पर मौजूद लोगों के ऊपर फूलों की पंखुड़ियां बरसाएगा। यानी इस बार समारोह में परंपरा, देशभक्ति और आधुनिक प्रस्तुति तीनों का मेल देखने को मिलेगा।
‘वंदे मातरम्’ को लाल किले के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में शामिल किए जाने की यह पहल इसलिए भी खास है क्योंकि प्रधानमंत्री के आगमन के बाद गीत का गायन होगा और उसके बाद राष्ट्रीय ध्वज फहराने तथा प्रधानमंत्री के संबोधन की पारंपरिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसका मतलब है कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस समारोह की शुरुआत ही एक ऐसे गीत से होगी, जिसका भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में विशेष स्थान रहा है।
इस आयोजन में युवाओं को भी विशेष रूप से केंद्र में रखा गया है। सरकार ने इस साल की थीम के जरिए देश की युवा पीढ़ी की उपलब्धियों और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में उनकी भूमिका को सामने लाने की कोशिश की है। विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल करने वाले युवा इस समारोह का हिस्सा बनेंगे। ऐसे में इस बार लाल किले का मंच सिर्फ स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को याद करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत के भविष्य और युवा शक्ति पर भी फोकस करेगा।
दिलचस्प बात यह है कि ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ को इस पूरे समारोह का एक प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। देशभर में 8 अगस्त से सैन्य बैंड के जरिए भी इस गीत को श्रद्धांजलि देने वाले कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। यानी लाल किले पर होने वाला गायन एक अकेला कार्यक्रम नहीं, बल्कि ‘वंदे मातरम्’ की ऐतिहासिक यात्रा और उसकी विरासत को याद करने वाले व्यापक आयोजन का हिस्सा है।
तो इस बार जब लाल किला, तिरंगा और ‘वंदे मातरम्’ एक ही ऐतिहासिक मंच पर दिखाई और सुनाई देंगे, तो स्वतंत्रता दिवस समारोह की तस्वीर निश्चित तौर पर यादगार होने वाली है। 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से पहली बार ‘वंदे मातरम्’ का गायन होना इस समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण रहेगा। आजादी के आंदोलन की याद, 150 साल पुरानी विरासत और देश की युवा शक्ति—इन तीनों को जोड़कर इस बार का स्वतंत्रता दिवस एक नए अंदाज में मनाया जाएगा।
written by:- Anjali Mishra
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