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धर्म और आस्था(Dharma-Karma)

धर्मांतरण से ‘घर वापसी’ तक! आयुष मलिक केस में नया मोड़, परिवार के दावों से बढ़ी चर्चा |

उत्तर प्रदेश के शामली का चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। करीब चार वर्ष पहले धर्म परिवर्तन कर निकाह करने वाले आयुष मलिक ने अब अपने परिवार के साथ दोबारा सनातन धर्म में लौटने यानी ‘घर वापसी’ की घोषणा की है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में आयुष अपने माता-पिता के साथ पूजा-अर्चना करते दिखाई दे रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद मामला एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक एवं सामाजिक हलकों तक इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

आयुष मलिक का मामला पहले भी काफी चर्चा में रहा था। उस समय धर्म परिवर्तन और निकाह को लेकर विभिन्न स्तरों पर बहस हुई थी। अब चार साल बाद उनके दोबारा सनातन धर्म अपनाने के फैसले ने इस मामले को नया मोड़ दे दिया है। वायरल वीडियो में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान आयुष अपने परिवार के साथ नजर आ रहे हैं, जिसके बाद ‘घर वापसी’ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, वायरल वीडियो और उससे जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

इस पूरे मामले में आयुष के पिता देवराज मलिक ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उनके बेटे का कथित तौर पर ब्रेनवॉश किया गया और उसे परिवार से दूर कर पारिवारिक संपत्ति पर कब्जा करने की साजिश रची गई। उनका कहना है कि परिवार लंबे समय से इस स्थिति से परेशान था और अब बेटे के वापस आने से उन्हें राहत मिली है। हालांकि, ये आरोप परिवार की ओर से लगाए गए दावे हैं और इनकी पुष्टि किसी न्यायिक या जांच एजेंसी द्वारा नहीं की गई है।

दूसरी ओर, इस मामले को लेकर धार्मिक पक्ष भी सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स में जमीयत से जुड़े मौलाना साजिद कासमी के हवाले से कहा जा रहा है कि इस्लामी शरीयत के अनुसार यदि कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन कर इस्लाम छोड़ देता है, तो उसका निकाह स्वतः समाप्त माना जाता है। हालांकि, यह एक धार्मिक व्याख्या है और इसका कानूनी प्रभाव संबंधित परिस्थितियों तथा लागू कानूनों के आधार पर अलग हो सकता है।

यही कारण है कि इस मामले में धार्मिक और कानूनी पक्षों को अलग-अलग समझना आवश्यक है। किसी भी विवाह, धर्म परिवर्तन या वैवाहिक स्थिति को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति केवल संबंधित कानूनों और न्यायालय के निर्णय के आधार पर ही तय होती है। यदि यह मामला अदालत में विचाराधीन है या भविष्य में न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बनता है, तो सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही अंतिम निष्कर्ष निकलेगा।

सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग इसे व्यक्ति की धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत निर्णय का विषय मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे सामाजिक और पारिवारिक दृष्टिकोण से देख रहे हैं। ऐसे मामलों में भावनाएं प्रबल होती हैं, लेकिन किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक तथ्यों और न्यायिक प्रक्रिया का इंतजार करना आवश्यक होता है।

भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छा से धर्म अपनाने, बदलने या किसी धर्म का पालन न करने की स्वतंत्रता देता है, वहीं विवाह, संपत्ति और अन्य कानूनी अधिकारों से जुड़े मामलों का निर्णय संबंधित कानूनों और न्यायालयों के माध्यम से किया जाता है। इसलिए इस मामले में भी केवल सार्वजनिक दावों या वायरल वीडियो के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

फिलहाल शामली का यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है। आयुष मलिक की ‘घर वापसी’, परिवार की ओर से लगाए गए आरोप और धार्मिक पक्ष से सामने आए बयान कई नए सवाल खड़े कर रहे हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि इस मामले से जुड़े सभी दावे संबंधित पक्षों के बयान हैं। यदि मामला न्यायिक प्रक्रिया में है, तो अंतिम सच्चाई और कानूनी स्थिति अदालत के निर्णय तथा आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

written by:- Anjali Mishra

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