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भारत को पाकिस्तान की बदलती सैन्य रणनीति को लेकर सतर्क रहने की जरूरत: शशि थरूर

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने हाल ही में कहा है कि भारत को पाकिस्तान की बदलती सैन्य रणनीति को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम पर पाकिस्तान के बढ़ते फोकस पर चिंता जताई। उनका मानना है कि पाकिस्तान इस नई तकनीक के जरिए क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जो सीधे तौर पर भारत की सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकती है।

थरूर ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर के बढ़ते प्रभाव और उनके भारत विरोधी रुख की भी ओर ध्यान दिलाया। उनका कहना है कि मुनीर की रणनीतियाँ केवल आंतरिक सैन्य निर्णयों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर भी असर डालती हैं। थरूर ने बताया कि भारत ने पहले भी ऐसे खतरों का सामना किया है और अनुभव से सीखा है कि सतर्क रहना और रणनीतिक तैयारी रखना बेहद जरूरी है।

शशि थरूर का कहना है कि भारत को अपनी सुरक्षा को लेकर किसी भी परिस्थिति में पूरी तरह तैयार रहना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नए हथियार प्रणालियों और तकनीकी बदलावों के मद्देनजर भारत को अपनी रणनीतियों को अपडेट करना चाहिए। उनका मानना है कि केवल कूटनीतिक प्रयासों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि रक्षा तैयारियों को मजबूत करना भी अनिवार्य है।

थरूर ने हाइपरसोनिक मिसाइल की तकनीक पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह मिसाइल सिस्टम बेहद तेज गति से उड़ती है और पारंपरिक रॉकेट डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती है। इसलिए पाकिस्तान द्वारा इस तकनीक में निवेश करना भारत के लिए एक चुनौती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उन्होंने यह भी बताया कि भारत को इस पर नियंत्रण रखने के लिए नई सुरक्षा रणनीतियों और उन्नत डिफेंस सिस्टम तैयार करने होंगे। साथ ही, उन्हें क्षेत्रीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रणालियों का सहारा लेने की भी आवश्यकता है। थरूर ने कहा कि केवल भारत की सैन्य शक्ति ही इस चुनौती का समाधान नहीं है, बल्कि रणनीतिक संतुलन और प्रौद्योगिकी पर ध्यान देना भी जरूरी है।

कांग्रेस नेता ने यह स्पष्ट किया कि पाकिस्तान के किसी भी सैन्य उभार को कम करके नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुभव दिखाता है कि पूर्वानुमान और सतर्कता के बिना किसी भी नई तकनीक का असर गंभीर हो सकता है। इसलिए भारत को हर हाल में अपनी तैयारी में कोई कमी नहीं छोड़नी चाहिए।

थरूर ने भारतीय नागरिकों और सरकार को आश्वस्त किया कि भारत अपनी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे पूर्व अनुभव और रणनीतिक फैसले यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी भी संभावित खतरे का मुकाबला प्रभावी तरीके से किया जा सके।

इस संदर्भ में थरूर ने यह भी सुझाव दिया कि सुरक्षा मामलों में राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि केवल सरकार या सेना पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं, बल्कि संयुक्त रणनीति ही क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।

अंततः शशि थरूर की बातों से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की बदलती सैन्य रणनीतियों और हाइपरसोनिक मिसाइल फोकस को लेकर भारत को सतर्क रहना और अपनी रक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत करना अनिवार्य है। उनका कहना है कि अनुभव और तकनीकी तैयारी दोनों के माध्यम से ही भारत अपने क्षेत्रीय हितों और सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकता है।

written by :- Anjali Mishra

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