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स्कूल बंद..बच्चे बोले – हमारा भविष्य कहां है ?

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के रुद्रपुर भलुहि स्थित एक प्राथमिक विद्यालय का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर भावनात्मक तूफान खड़ा कर रहा है। वायरल हो रहे इस वीडियो में स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे बेहद मासूमियत के साथ कैमरे के सामने अपनी पीड़ा जाहिर करते नजर आ रहे हैं। बच्चों की आंखों में पढ़ाई से वंचित होने की बेचैनी और भविष्य को लेकर चिंता स्पष्ट झलक रही है। स्कूल बंद होने की वजह से न सिर्फ उनकी शिक्षा बाधित हुई है, बल्कि उनके सपनों पर भी मानो ब्रेक लग गया है। ये बच्चे अपने अभिव्यक्त शब्दों में बार-बार पूछते नजर आते हैं कि “हम कब पढ़ेंगे?” — यह प्रश्न न सिर्फ उनके अंदर की पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि उस सरकारी तंत्र पर भी सवाल उठाता है जो शिक्षा जैसे मौलिक अधिकार को समय पर और प्रभावी ढंग से सुनिश्चित नहीं कर पा रहा है।

गांव के इस प्राथमिक विद्यालय का बंद होना, प्रशासनिक लापरवाही और शिक्षा व्यवस्था की असंवेदनशीलता की ओर भी इशारा करता है। वीडियो में एक बच्चा कहता है, “हम भी बड़ा आदमी बनना चाहते हैं, पढ़-लिखकर कुछ करना चाहते हैं, लेकिन स्कूल ही नहीं खुल रहा है…” इस एक वाक्य में उस पूरी पीढ़ी की पीड़ा छिपी है, जो गांवों और पिछड़े इलाकों में सिर्फ इसलिए पीछे छूट जाती है क्योंकि उनकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं होता। यह वीडियो सिर्फ महराजगंज के एक स्कूल की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सैकड़ों ग्रामीण स्कूलों का प्रतिनिधित्व करता है जो कभी भवन की कमी, कभी शिक्षकों की अनुपस्थिति, तो कभी सरकारी लापरवाही की वजह से बंद हो जाते हैं, और जिनका खामियाजा उन मासूम बच्चों को भुगतना पड़ता है, जिनके पास विकल्प नहीं होते।

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इस वीडियो के वायरल होने के बाद तमाम शिक्षक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों ने प्रशासन से इस मामले में त्वरित कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने वीडियो पर प्रतिक्रिया दी है और बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल दोबारा खुलवाने की अपील की है। यह स्थिति इस बात की ओर भी इशारा करती है कि आज भी डिजिटल इंडिया के दौर में, ग्रामीण भारत के कई कोने ऐसे हैं जहां बच्चों की शिक्षा सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रही है। शिक्षा का अधिकार सिर्फ नीति पत्रों में दर्ज रह जाए और ज़मीनी स्तर पर बच्चे यूं ही “कब पढ़ेंगे?” पूछते रह जाएं, तो यह किसी भी लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

सरकार को इस वीडियो को चेतावनी के रूप में लेना चाहिए और ऐसे सभी विद्यालयों की तत्काल जांच कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी बच्चे का भविष्य सिर्फ व्यवस्था की लापरवाही की भेंट न चढ़े। स्कूलों की मरम्मत, शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता जैसी बुनियादी चीज़ों को अगर आज प्राथमिकता नहीं दी गई, तो आने वाले समय में शिक्षा के प्रति विश्वास कमजोर होगा और सबसे ज्यादा नुकसान उन्हीं बच्चों को होगा, जो अपने बेहतर कल का सपना लिए रोज़ उस बंद पड़े स्कूल के दरवाज़े की ओर उम्मीद से देखते हैं।

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