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बिहार चुनाव पर ओमप्रकाश राजभर का बड़ा ऐलान !

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। बलिया में एक सभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने एक बड़ा बयान देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा कि बिहार में अब फर्जी वोटर और विदेशी नागरिक सरकारी योजनाओं से बाहर होंगे। यह बयान उस वक्त आया है जब बिहार की राजनीति जातीय समीकरणों और गठबंधन की राजनीति के इर्द-गिर्द घूम रही है।

राजभर ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल, खासकर महागठबंधन, फर्जी वोटरों के सहारे सत्ता में आने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसे लोग न केवल चुनावों को प्रभावित करते हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं का गलत लाभ भी उठाते हैं। उनके मुताबिक, यदि एनडीए सत्ता में आई, तो सबसे पहले इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और राशन, आवास जैसी योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं को मिलेगा जो वैध दस्तावेज़ के साथ नागरिक हैं।

ओमप्रकाश राजभर का यह बयान केवल चुनावी रणनीति नहीं बल्कि एनडीए के चुनावी एजेंडे का संकेत भी माना जा रहा है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि “हम बिहार में एनडीए के साथ हैं, और जो सीटें हमें मिलेंगी, वहीं से चुनाव लड़ेंगे।” यह बात उस अटकल पर विराम लगाती है कि सुभासपा एनडीए से अलग होकर अपना रास्ता बना सकती है। राजभर ने अपने भाषण में कई बार यह दोहराया कि उनकी प्राथमिकता ‘सशक्त और ईमानदार शासन’ की स्थापना है।

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राजभर ने मुख्यमंत्री पद के सवाल पर भी चतुराई से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि “मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला चुनाव के बाद होगा।” यह बयान एनडीए में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी असमंजस की ओर भी इशारा करता है। हालांकि उन्होंने किसी नाम का जिक्र नहीं किया, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया कि सुभासपा अपने दम पर मुख्यमंत्री के दावे में नहीं है, बल्कि साझा निर्णय में विश्वास रखती है।

यह बयान ऐसे समय पर आया है जब बिहार की सियासत में नेतृत्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। नीतीश कुमार की भूमिका सीमित होती दिख रही है और भाजपा को भी अपने चेहरे को लेकर रणनीति बनानी पड़ रही है। राजभर के बयान को भाजपा के संभावित “सुराग” के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह समझा जा सके कि दलित-पिछड़ा वोट बैंक को कैसे साधा जाए। ऐसे में सुभासपा जैसी छोटी मगर जातीय रूप से प्रभावशाली पार्टी की भूमिका अहम मानी जा रही है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि राजभर के इस बयान का विपक्ष कैसे जवाब देता है। महागठबंधन पहले से ही भाजपा और उसके सहयोगियों पर विभाजनकारी राजनीति का आरोप लगाता रहा है। लेकिन राजभर की रणनीति यही दिखा रही है कि एनडीए बिहार चुनाव में “नागरिकता, पहचान और वैधता” को केंद्र में रखकर एक नया नैरेटिव तैयार कर रहा है—जो वोटरों को भी सोचने पर मजबूर करेगा।

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