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मेरठ के इस्लामाबाद का नाम बदलेगा ?

उत्तर प्रदेश में हाल के वर्षों में जिलों और शहरों के नाम बदलने का सिलसिला चर्चा में रहा है। अब यह बहस और आगे बढ़ते हुए मोहल्लों के नाम तक पहुँच गई है। इसी कड़ी में मेरठ के एक प्रमुख इलाके, इस्लामाबाद मोहल्ले का नाम बदलने की मांग उठी है। यह मुद्दा सीधे प्रदेश की विधान परिषद तक पहुँचा, जहाँ इसे औपचारिक रूप से ‘विजन 2047’ दस्तावेज़ पर चर्चा के दौरान उठाया गया। यह दस्तावेज़ आने वाले 22 वर्षों में उत्तर प्रदेश को विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के लिए बनाई गई दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है।

इस बहस के दौरान परिषद के सदस्य धर्मेंद्र भारद्वाज ने गुरुवार, 14 अगस्त 2025 को सदन में स्पष्ट रूप से कहा कि मेरठ को भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का उद्गम स्थल माना जाता है। उन्होंने तर्क दिया कि इस शहर का हर कोना, हर गली, आज़ादी की लड़ाई के इतिहास और वीर बलिदानों की गवाही देता है। ऐसे में, यहां के किसी मोहल्ले का नाम स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर रखना न केवल उचित है बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी होगा।

धर्मेंद्र भारद्वाज ने सुझाव दिया कि इस्लामाबाद मोहल्ले का नाम बदलकर स्वतंत्रता सेनानी मातादीन वाल्मीकि के नाम पर रखा जाए। मातादीन वाल्मीकि 1857 के विद्रोह में एक अहम किरदार थे। वे न केवल मेरठ के, बल्कि पूरे देश के स्वतंत्रता संग्राम में अपनी बहादुरी और बलिदान के लिए याद किए जाते हैं। उनका नाम मोहल्ले को देकर, वहां के निवासियों और आगंतुकों को इस वीर सपूत की गाथा से परिचित कराया जा सकेगा।

इस प्रस्ताव के पीछे एक बड़ा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदेश भी छिपा है। नाम बदलना सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह हमारी सोच और पहचान का हिस्सा बन जाता है। मातादीन वाल्मीकि के नाम पर मोहल्ले का नामकरण करना, सामाजिक समरसता और ऐतिहासिक गौरव दोनों को जोड़ने का प्रयास होगा। इससे न केवल स्थानीय लोगों में गर्व की भावना बढ़ेगी, बल्कि यह जगह आने वाले पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए भी ऐतिहासिक महत्व की होगी।

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हालांकि, ऐसे नाम परिवर्तन प्रस्तावों पर अक्सर बहस भी होती है। कुछ लोग इन्हें इतिहास को सम्मान देने का तरीका मानते हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से देखते हैं। लेकिन इस मामले में परिषद सदस्य का तर्क यह है कि मेरठ की ऐतिहासिक पहचान को और मजबूत किया जाए, और वहां के स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को वह सम्मान मिले जिसके वे हकदार हैं।

अब देखना यह होगा कि सरकार और स्थानीय प्रशासन इस प्रस्ताव पर क्या कदम उठाते हैं। अगर यह मांग मंजूर होती है, तो मेरठ का इस्लामाबाद मोहल्ला जल्द ही “मातादीन वाल्मीकि नगर” के नाम से जाना जाएगा। यह परिवर्तन न केवल एक नाम का होगा, बल्कि यह मेरठ की ऐतिहासिक धरोहर को जीवित रखने और स्वतंत्रता संग्राम की अमर गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रतीक बनेगा।

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