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सत्ता का संग्राम (Politics)

विवादों के घेरे में फिर विजय शाह: बयान, सियासत और महिलाओं की गरिमा पर उठते सवाल

कैबिनेट मंत्री विजय शाह एक बार फिर अपने बयान को लेकर तीखे विवाद में घिर गए हैं। इससे पहले देश की शान मानी जाने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी ने उन्हें कठघरे में खड़ा कर दिया था, और अब उनका नया बयान लाड़ली बहनों को लेकर सामने आया है, जिसने सियासी पारा और ज्यादा गर्म कर दिया है। लगातार विवादों में रहने से उनकी छवि पर सवाल उठने लगे हैं।

विजय शाह ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के सम्मान कार्यक्रम को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने विपक्ष को आक्रामक होने का मौका दे दिया। उन्होंने कहा कि जो लाड़ली बहनें कार्यक्रम में आएंगी, उनकी मासिक सहायता राशि में ₹250 की बढ़ोतरी होगी, जबकि जो बहनें नहीं आएंगी, उनका वेरिफिकेशन पेंडिंग रखा जाएगा। बयान सामने आते ही इसे दबाव और अप्रत्यक्ष धमकी के रूप में देखा जाने लगा।

विपक्ष का कहना है कि यह बयान सीधे तौर पर माताओं-बहनों को मजबूर करने जैसा है। उनका आरोप है कि सरकारी योजनाओं को राजनीतिक कार्यक्रमों से जोड़ना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। विपक्षी दलों ने इसे महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि सहायता कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका अधिकार है।

आलोचकों का यह भी कहना है कि इस तरह के बयान बीजेपी की महिला विरोधी सोच को उजागर करते हैं। उनका तर्क है कि अगर कोई महिला किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होना चाहती, तो उसके हक की सरकारी सहायता रोकने या लटकाने की बात करना पूरी तरह गलत है। इससे महिलाओं में भय और असहजता का माहौल बनता है।

लाड़ली बहना योजना को अब तक महिलाओं के सशक्तिकरण से जोड़कर देखा जाता रहा है। ऐसे में इस योजना को राजनीतिक उपस्थिति से जोड़ने की बात ने योजना की मूल भावना पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि इससे योजना की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंच सकता है।

विजय शाह के बयान पर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या सरकारी योजनाएं अब कार्यक्रमों में भीड़ जुटाने का साधन बन जाएंगी। कई यूजर्स ने इसे महिलाओं के आत्मसम्मान से खिलवाड़ बताया है।

यह विवाद ऐसे समय पर सामने आया है, जब बीजेपी महिला वोटर्स को अपने मजबूत आधार के रूप में पेश करती रही है। ऐसे में पार्टी के ही एक वरिष्ठ मंत्री का यह बयान राजनीतिक रूप से भी नुकसानदायक माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व पर भी दबाव बढ़ रहा है कि वह इस बयान पर क्या रुख अपनाता है।

फिलहाल विजय शाह की ओर से इस बयान पर कोई साफ सफाई सामने नहीं आई है, लेकिन विपक्ष लगातार माफी और कार्रवाई की मांग कर रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह मामला भी पिछले विवादों की तरह कुछ दिनों में ठंडा पड़ जाएगा, या फिर इस बार कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।

कुल मिलाकर, विजय शाह का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं रह गया है, बल्कि यह महिलाओं की गरिमा, अधिकार और सरकारी योजनाओं की निष्पक्षता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में इस पर सियासत और तेज होने के आसार साफ नजर आ रहे हैं।

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