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सपा सांसद प्रिया सरोज का सवाल — क्या यूपी में बुलडोजर बनना बंद हो गए?

समाजवादी पार्टी की युवा सांसद प्रिया सरोज ने लखनऊ के काकोरी इलाके में पासी समाज के बुजुर्ग रामपाल पासी के साथ हुई अमानवीय घटना को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर पोस्ट करते हुए प्रदेश सरकार पर सवालों की बौछार कर दी। प्रिया सरोज ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि तीन दिन बीत जाने के बावजूद अभी तक आरोपियों पर कोई ठोस और सख्त कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने लिखा कि अगर पीड़ित किसी उच्च वर्ग से होता, तो शायद अब तक प्रशासन का बुलडोजर कई बार चल चुका होता। लेकिन दलित समाज के एक गरीब बुजुर्ग के साथ हुए इस अत्याचार पर सरकार की चुप्पी बहुत कुछ कहती है।

प्रिया सरोज ने अपने बयान में तंज कसते हुए कहा कि क्या उत्तर प्रदेश में बुलडोजर अब बंद हो गए हैं, या फिर जब बात ‘Manuwadi सोच’ से जुड़े लोगों की आती है तो उसका इंजन फेल हो जाता है। उनका यह बयान न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी अब सामाजिक न्याय और दलित वर्गों के मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपनाने जा रही है। प्रिया ने कहा कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, लेकिन मौजूदा सरकार में न्याय का पलड़ा सत्ता के करीबियों की ओर झुकता दिख रहा है।

सांसद ने यह भी कहा कि रामपाल पासी जैसे गरीब और पिछड़े वर्ग के लोग जब न्याय की उम्मीद लेकर प्रशासन के दरवाजे खटखटाते हैं, तो उन्हें केवल आश्वासन मिलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना न केवल जातिगत भेदभाव को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि राज्य में दलितों की सुरक्षा का दावा सिर्फ़ कागज़ों पर है। उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले की एसआईटी जांच कराई जाए और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए ताकि समाज में यह संदेश जाए कि न्याय जिंदा है।

प्रिया सरोज ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि “योगी सरकार के बुलडोजर की गूंज गरीबों और अल्पसंख्यकों तक ही क्यों सीमित है?” उन्होंने कहा कि अगर यह सरकार सच में न्यायप्रिय है, तो उसे इस घटना पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए और पीड़ित परिवार को सुरक्षा के साथ उचित मुआवज़ा देना चाहिए। उन्होंने प्रदेश के दलित, पिछड़े और वंचित समुदायों से अपील की कि वे इस अन्याय के खिलाफ एकजुट होकर आवाज़ उठाएं, क्योंकि मौन रहना अन्याय को बढ़ावा देना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रिया सरोज का यह बयान आगामी लोकसभा चुनाव 2029 और यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी की रणनीति का हिस्सा है, जिसमें पार्टी फिर से “समाजिक न्याय” और “दलित-पिछड़ा एकता” के मुद्दों को केंद्र में ला रही है। प्रिया सरोज, जो सपा की नई पीढ़ी का चेहरा मानी जाती हैं, का यह आक्रामक तेवर बताता है कि पार्टी अब भाजपा सरकार की नीतियों पर केवल विपक्ष नहीं, बल्कि सक्रिय चुनौती देने के मूड में है। उनके बयान ने न केवल सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है, बल्कि यह भी साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में अब दलित मुद्दे फिर से केंद्र बिंदु बनने वाले हैं।

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