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भारत को पुतिन की बधाई, बोले- दुनिया करता है सम्मान !

15 अगस्त 2025 को भारत अपने 79वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मना रहा था। इस अवसर पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने न सिर्फ भारत को बधाई दी, बल्कि देश की वैश्विक प्रतिष्ठा और उसकी सक्रिय भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि “भारत को वैश्विक स्तर पर अच्छी–खासी प्रतिष्ठा प्राप्त है” और वह अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को सुलझाने में महत्वपूर्ण योगदान करता है। साथ ही, उन्होंने भारत और रूस के बीच “विशेष, привिलेज्ड रणनीतिक साझेदारी” को भी बलपूर्वक दोहराया।

पुतिन ने अपने संदेश में यह ज़ाहिर किया कि दोनों देशों के बीच सहयोग केवल प्रमाण नहीं, बल्कि यह सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय–वैश्विक हितों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने इस साझेदारी को दोनों देशों की “दोस्त जनता के हितों के अनुरूप” बताया और भरोसा जताया कि संयुक्त प्रयासों से दोनों राष्ट्र विभिन्न क्षेत्रों में रचनात्मक द्विपक्षीय सहयोग को और व्यापक बना सकेंगे।

इस बधाई संदेश के साथ ही पुतिन ने भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों को अपनी शुभकामनाएँ भेजीं, जो इस उच्चस्तरीय सम्मान और फ्रेंडशिप को दर्शाता है। यह द्योतक है कि रूस इस साझेदारी को सिर्फ राजनयिक रूप से ही नहीं, बल्कि भावनात्मक स्तर पर भी मजबूत मानता है।

दूसरी ओर, उसी समय एक और वैश्विक घटना ने सबका ध्यान खींचा। 15 अगस्त 2025 को अलास्का, संयुक्त राज्य अमेरिका में ऐतिहासिक रूप से पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और राष्ट्रपति पुतिन के बीच एक उच्चस्तरीय वार्ता सम्पन्न हुई। यह वार्ता प्रमुख रूप से यूक्रेन युद्ध पर केंद्रित थी, पर इसका परिणाम कोई औपचारिक शांति समझौता नहीं बन सका। दोनों नेताओं ने बैठक को ‘उत्पादक’ बताया, लेकिन कोई निष्क्रियता (ceasefire) या ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।

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रिपोर्टों के अनुसार, यह बैठक अमेरिका में आयोजित एक रूसी राष्ट्रपति की पहली पहुंच थी (ICC गिरफ्तारी वारंट की पृष्ठभूमि में), और इसे पुतिन के लिए एक महत्वपूर्ण वैश्विक पुनरागमन भी माना गया। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेताओं ने कोई सवालों का जवाब नहीं दिया और वार्ता का मुख्य उद्देश्य—यूक्रेन में युद्ध के लिए स्थायी समाधान—पूरी तरह से अधूरा रहा।

इसके बावजूद, इस Alaska बैठक ने पुतिन को वैश्विक मंच पर एक प्रभावशाली चित्र प्रदान किया—एक ऐसा नेता जो पश्चिम में स्वीकार्यता पाने की राह पर है। वहीं ट्रम्प ने सीधी तौर पर कोई सम्झौता न होने पर कहा कि “डील तब तक नहीं जब तक डील न हो”, और भविष्य में बातचीत जारी रखने का संकेत दिया, साथ ही पुतिन को मास्को आमंत्रित भी किया

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