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सत्ता का संग्राम (Politics)

नेशनल हेराल्ड केस: ईडी ने सोनिया-राहुल को बनाया आरोपी नंबर 1 और 2, 661 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की मां

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) – यंग इंडियन – नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 661 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने की मांग की है। यह संपत्ति जांच के दौरान अस्थायी रूप से अटैच की गई थी। ईडी ने यह आरोपपत्र 9 अप्रैल को विशेष अदालत में दाखिल किया, जो सांसदों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई करती है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 अप्रैल को तय की है।

सूत्रों के अनुसार, इस आरोपपत्र में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी को “आरोपी नंबर 1” और राहुल गांधी को “आरोपी नंबर 2” के रूप में नामित किया गया है। दोनों नेता यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (वाईआई) में 38-38 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। ईडी का आरोप है कि वाईआई के माध्यम से एजेएल की बहुमूल्य संपत्तियों को अवैध रूप से प्राप्त किया गया और इसका उद्देश्य वाणिज्यिक लाभ उठाना था, जबकि वाईआई कंपनी अधिनियम की धारा 25 के तहत एक गैर-लाभकारी संस्था के रूप में रजिस्टर्ड है।

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ईडी ने अपने आरोपपत्र में सोनिया और राहुल गांधी के 2022 में लिए गए बयान भी संलग्न किए हैं, जिनमें उन्होंने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया और कहा कि वे एजेएल की आर्थिक मदद के लिए आयोजित बैठकों का हिस्सा भर थे। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के प्रमुख निर्णय स्वर्गीय कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा लेते थे, जो 2001 से 2002 तक एजेएल के अध्यक्ष थे।

एजेंसी ने आरोपपत्र में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता पवन बंसल के बयान भी जोड़े हैं। ईडी का दावा है कि यह सभी गतिविधियाँ एक साजिश का हिस्सा थीं, जिसका उद्देश्य वाईआई के लाभकारी मालिकों को (सोनिया और राहुल गांधी) एजेएल की संपत्तियों का मालिक बनाना था।

ईडी के अनुसार, एजेएल ने 2023 तक अपनी विभिन्न संपत्तियों से 142.67 करोड़ रुपये का किराया अर्जित किया है और इस रकम का उपयोग मुंबई सहित कई स्थानों पर वाणिज्यिक स्थलों के विकास में किया गया है।

कांग्रेस ने आरोपपत्र को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा कि यह कार्रवाई केंद्र सरकार की घबराहट और जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है। पार्टी ने कहा कि यह जांच पूरी तरह से बदले की भावना से प्रेरित है और भाजपा सरकार का नैतिक दिवालियापन उजागर करती है।

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ईडी ने संपत्तियों की जब्ती के साथ-साथ आरोपियों को मनी लॉन्ड्रिंग के तहत कड़ी सजा देने की भी मांग की है। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो जब्त की गई संपत्तियों की नीलामी कर उनकी राशि सरकार के खजाने में भेजी जाएगी।

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