जिनपिंग 7 साल बाद भारत आए… गलवान के बाद चीन से आयात हुआ दोगुना! क्या बदल रहे हैं भारत-चीन रिश्ते?
सात साल बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत पहुंचे हैं। मौका है 2026 का BRICS शिखर सम्मेलन और इसी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिनपिंग की अहम द्विपक्षीय बैठक भी हुई है। यह मुलाकात इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन रिश्तों में लंबे समय तक तनाव रहा।
लेकिन इस पूरी कहानी में एक आंकड़ा सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है गलवान के बाद भी भारत का चीन से आयात कम नहीं हुआ, बल्कि तेजी से बढ़ा। उपलब्ध व्यापार आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में चीन से भारत का आयात करीब 132 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि 2025 में दोनों देशों का कुल द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड करीब 155.6 अरब डॉलर रहा।
यानी एक तरफ सीमा पर तनाव था, सैनिकों की तैनाती बढ़ी और भारत ने चीन पर कई तरह के आर्थिक और तकनीकी प्रतिबंध लगाए… लेकिन दूसरी तरफ भारतीय बाजार में चीनी सामान और कंपोनेंट्स की मांग बनी रही।
दरअसल, चीन से भारत सिर्फ तैयार सामान ही नहीं मंगाता। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, केमिकल्स, सोलर से जुड़े उत्पाद, फार्मा इनपुट और कई औद्योगिक कंपोनेंट्स के लिए भारतीय उद्योग चीन पर काफी निर्भर है। यही वजह है कि राजनीतिक और सैन्य तनाव के बावजूद व्यापार पूरी तरह टूट नहीं पाया।
अब जिनपिंग की भारत यात्रा में यही व्यापारिक असंतुलन एक बड़ा मुद्दा है। भारत की चिंता सिर्फ यह नहीं है कि चीन से कितना सामान आ रहा है, बल्कि यह भी है कि भारत चीन को उसके मुकाबले कितना निर्यात कर पा रहा है। फिलहाल भारत का चीन के साथ बड़ा व्यापार घाटा बना हुआ है।
और इसके साथ सबसे अहम मुद्दा है सीमा पर शांति। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ संकेत दिया है कि भारत-चीन संबंधों में आगे बढ़ने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है। दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मतभेदों को विवाद में बदलने से बचना चाहिए और बातचीत के जरिए सीमा संबंधी मुद्दों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
तो क्या ये मुलाकात भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत है? तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है। सैन्य तनाव में कमी और बातचीत की बहाली जरूर हुई है, लेकिन सीमा विवाद, व्यापार घाटा और चीन पर कुछ रणनीतिक निर्भरता जैसे मुद्दे अभी भी मौजूद हैं।
और इसी बीच भारत मंडपम में BRICS का बड़ा मंच दुनिया की नजरों में है। भारत इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है और रूस, चीन समेत प्रमुख BRICS देशों के नेता दिल्ली में जुटे हैं। ऐसे में मोदी-जिनपिंग मुलाकात सिर्फ दो नेताओं की बैठक नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत की कूटनीति का बड़ा टेस्ट भी मानी जा रही है।
अब बड़ा सवाल यही है क्या गलवान के बाद तनाव झेल चुके भारत-चीन रिश्ते अब कारोबार और सीमा शांति के जरिए नई दिशा में जाएंगे, या पुराने मतभेद फिर रास्ते में आ जाएंगे?
written by :- Anjali Mishra
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