भारत की चुनावी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी? CEC ज्ञानेश कुमार ने बताई पूरी व्यवस्था !
भारत में चुनाव सिर्फ मतदान के दिन होने वाली प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत मतदाता सूची तैयार करने से लेकर नतीजे घोषित होने तक कई चरणों में होती है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अहमदाबाद में भारत की चुनावी प्रक्रिया को दुनिया की सबसे पारदर्शी प्रणालियों में से एक बताया है।
उन्होंने कहा कि भारत की चुनाव व्यवस्था में पारदर्शिता सिर्फ चुनाव के दिन तक सीमित नहीं रहती। मतदाता सूची तैयार करने, मतदान कराने और वोटों की गिनती—हर महत्वपूर्ण चरण में राजनीतिक दलों और उनके अधिकृत एजेंटों की सीधी निगरानी रहती है।
अब इसे आसान भाषा में समझिए। सबसे पहले मतदाता सूची तैयार होती है। इसमें कौन वोट डाल सकता है और किसका नाम सूची में है, यह चुनाव प्रक्रिया का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। राजनीतिक दलों और उनके प्रतिनिधियों को भी इस पूरी प्रक्रिया में अपनी आपत्तियां और दावे रखने का मौका मिलता है।
इसके बाद आता है मतदान का चरण। पोलिंग बूथ पर राजनीतिक दलों के एजेंट मौजूद रहते हैं और मतदान की प्रक्रिया को करीब से देखते हैं। यानी चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी पूरी प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्सों के गवाह होते हैं।
इसके बाद सबसे अहम चरण आता है मतगणना यानी वोटों की गिनती। काउंटिंग सेंटर पर भी उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के एजेंट मौजूद रहते हैं। ईवीएम से लेकर मतगणना की प्रक्रिया तक कई स्तरों पर निगरानी और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।
CEC ज्ञानेश कुमार का कहना है कि इसी तरह की बहु-स्तरीय निगरानी और भागीदारी भारत की चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता को मजबूत करती है। यानी चुनाव आयोग अकेले पूरी प्रक्रिया नहीं चलाता, बल्कि राजनीतिक दलों और उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
भारत जैसे बड़े देश में यह प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां करोड़ों मतदाता और लाखों मतदान केंद्र होते हैं। अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और क्षेत्रों के बावजूद एक समान चुनावी व्यवस्था के तहत चुनाव कराना अपने आप में बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।
हालांकि, चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक दलों और विपक्ष की तरफ से समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसे में CEC का यह बयान इस बात पर जोर देता है कि चुनाव प्रक्रिया के हर चरण में निर्धारित नियमों, निगरानी और राजनीतिक एजेंटों की भागीदारी पारदर्शिता का महत्वपूर्ण आधार है।
यानी भारत की चुनावी व्यवस्था को समझने के लिए सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि वोट किस दिन डाला गया। असली प्रक्रिया मतदाता सूची से शुरू होकर मतदान और फिर मतगणना तक चलती है।
अब सवाल यही है क्या इतनी बड़ी और जटिल चुनावी प्रक्रिया में मौजूद ये निगरानी व्यवस्था भारत के चुनावों में लोगों का भरोसा और मजबूत कर सकती है?
written by :- Anjali Mishra
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