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दुनिया का दंगल (International)

भारत का स्पष्ट संदेश: ऊर्जा नीति पर किसी दबाव को जगह नहीं, जनता पहले, राजनीति बाद में !

अमेरिका में भारत पर 500% टैरिफ लगाने की चर्चाओं के बीच, भारत ने अपना रुख बिल्कुल स्पष्ट और मजबूत तरीके से पेश किया है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि देश अपने ऊर्जा से जुड़े फैसले किसी बाहरी दबाव या राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नहीं लेता। भारत का प्राथमिक उद्देश्य केवल एक है 140 करोड़ लोगों को सस्ती, सुरक्षित और निर्बाध ऊर्जा उपलब्ध कराना।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि रूस से तेल खरीदने के फैसले में भारत अपनी जरूरतों और बाजार की वास्तविक परिस्थितियों को ही प्राथमिकता देता है। इसका किसी राजनीतिक दबाव या अन्य देशों की राय से कोई लेना-देना नहीं है। भारत की नीति हमेशा अपने नागरिकों के हित में बनी है और बनी रहेगी।

उनका कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा किसी देश के दबाव या प्रतिबंध से तय नहीं होती। यह बाजार की स्थिति, वैश्विक सप्लाई और घरेलू जरूरतों के आधार पर तय होती है। भारत ने बार-बार यह साबित किया है कि उसकी ऊर्जा नीति पूरी तरह व्यावहारिक और स्वतंत्र है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में जब वैश्विक तेल और गैस बाजार में उतार-चढ़ाव है, भारत का यह रुख देश की आत्मनिर्भरता और रणनीतिक सोच का परिचायक है। भारत किसी भी परिस्थिति में अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।

रणधीर जायसवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत का दृष्टिकोण हमेशा देश पहले, राजनीति बाद में रहा है। चाहे वह तेल आयात का मामला हो, प्राकृतिक गैस की उपलब्धता या अक्षय ऊर्जा का विकास भारत अपने 140 करोड़ नागरिकों के हित में निर्णय लेता है, न कि बाहरी दबाव के प्रभाव में।

विदेश मंत्रालय का यह रुख अमेरिका और अन्य देशों के लिए भी एक संदेश है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों में समझौता नहीं करेगा। ऊर्जा सुरक्षा के मामलों में भारत पूरी तरह स्वतंत्र और निर्णयात्मक है। इससे वैश्विक समुदाय में भारत की साख और रणनीतिक शक्ति मजबूत होती है।

विश्लेषकों का मानना है कि यह स्पष्ट नीति न केवल ऊर्जा बाजार को स्थिरता देती है, बल्कि भारत के ऊर्जा आपूर्ति नेटवर्क को भी मजबूती प्रदान करती है। यह कदम भविष्य में देश के आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा दोनों के लिए निर्णायक साबित होगा।

सरल शब्दों में कहें तो भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी ऊर्जा नीति किसी बाहरी दबाव या राजनीतिक समीकरणों से प्रभावित नहीं होगी। 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना सर्वोपरि है और इसी दृष्टि से हर फैसला लिया जाएगा।

कुल मिलाकर, भारत ने अपने ऊर्जा रुख को लेकर पूरी दुनिया में स्पष्ट संदेश भेजा है राष्ट्रीय हित सबसे ऊपर हैं, और राजनीति या दबाव के कारण किसी भी निर्णय में समझौता नहीं होगा। ऊर्जा सुरक्षा और जनता की जरूरतें ही हमारी प्राथमिकता हैं।

written by :- Anjali Mishra

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