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प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना पर बड़ा सवाल, रिपोर्ट ने खोली हकीकत !

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को युवाओं को हुनरमंद बनाकर रोजगार से जोड़ने की एक बड़ी पहल माना गया था, लेकिन अब कैग रिपोर्ट और ग्राउंड रिपोर्ट ने इस योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कागजों पर मजबूत दिखने वाली यह योजना कई जगहों पर हकीकत में कमजोर साबित होती नजर आ रही है।

जांच के दौरान दिल्ली, भोपाल और गुजरात जैसे बड़े शहरों और राज्यों में कई कौशल विकास केंद्र या तो पूरी तरह बंद मिले या सिर्फ नाम के लिए चलते दिखाई दिए। जिन केंद्रों पर सरकार ने लाखों रुपये खर्च किए, वहां न तो छात्र मिले और न ही किसी तरह की ट्रेनिंग गतिविधि नजर आई।

हैरानी की बात यह रही कि योजना से जुड़े हेल्पलाइन नंबर और पते पर जब टीमें पहुंचीं, तो कई जगहों पर ताले लटके मिले। कुछ पते ऐसे निकले जहां कोई बोर्ड तक नहीं लगा था, जिससे यह साफ हो गया कि कई केंद्र सिर्फ दस्तावेजों में ही मौजूद हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई जगहों पर ट्रेनिंग का स्तर बेहद खराब है। न तो जरूरी मशीनें उपलब्ध हैं, न प्रशिक्षित ट्रेनर और न ही युवाओं को रोजगार से जोड़ने की कोई ठोस व्यवस्था। इससे योजना के मूल उद्देश्य पर ही सवाल उठने लगे हैं।

युवाओं को रोजगार के योग्य बनाने के लिए शुरू की गई इस योजना में सरकारी फंड के इस्तेमाल को लेकर भी संदेह गहराता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई केंद्रों को भुगतान तो हुआ, लेकिन उसके बदले जमीन पर कोई ठोस काम दिखाई नहीं दिया।

स्थानीय युवाओं का कहना है कि उन्होंने प्रशिक्षण के लिए आवेदन तो किया, लेकिन या तो क्लास शुरू ही नहीं हुई या फिर अधूरी ट्रेनिंग देकर छोड़ दी गई। इससे न सिर्फ उनका समय बर्बाद हुआ, बल्कि रोजगार की उम्मीद भी टूट गई।

कैग की रिपोर्ट ने यह भी संकेत दिया है कि निगरानी और ऑडिट सिस्टम में बड़ी खामियां हैं। अगर समय पर जांच और फीडबैक लिया जाता, तो शायद यह स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

अब बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जिन केंद्रों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, वहां असल में काम क्यों नहीं हो रहा और इसकी जिम्मेदारी किसकी है। क्या यह लापरवाही है या फिर सिस्टम में गहरी गड़बड़ी?

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को लेकर आई ये रिपोर्टें सरकार और प्रशासन दोनों के लिए चेतावनी मानी जा रही हैं। अगर समय रहते सुधार नहीं किए गए, तो युवाओं के भविष्य से जुड़ी यह महत्वाकांक्षी योजना भरोसे का संकट झेल सकती है और इसके उद्देश्य अधूरे ही रह जाएंगे।

written by :- Anjali Mishra

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