इंजीनियरों ने निभाई इंसानियत की जिम्मेदारी, लखनऊ में बड़ा रक्तदान शिविर !
लखनऊ में उत्तर प्रदेश डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने स्वर्गीय इंजीनियर आरके दत्त की पुण्यतिथि पर एक बड़े रक्तदान शिविर का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य सिर्फ श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि रक्तदान के जरिए जरूरतमंद मरीजों की मदद करना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का संदेश देना भी रहा।
शिविर का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने किया। इस मौके पर उन्होंने डिप्लोमा अभियंताओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश के विकास में डिप्लोमा इंजीनियर रीढ़ की तरह काम करते हैं। सड़क, भवन, बिजली, सिंचाई और दूसरी विकास परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि रक्तदान जैसी पहल इंजीनियरों की सामाजिक प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता को सामने लाती है। यानी जो कर्मचारी रोज प्रदेश के विकास से जुड़े काम करते हैं, वे जरूरत के समय समाज के लिए भी आगे आ रहे हैं।
महासंघ के मुताबिक, पूरे उत्तर प्रदेश में आयोजित रक्तदान अभियानों के जरिए करीब 3,000 यूनिट रक्तदान किया गया। वहीं लखनऊ मंडल में आयोजित शिविर में करीब 200 यूनिट रक्त एकत्र किया गया।
इस रक्तदान अभियान में सिर्फ विभागों में काम करने वाले इंजीनियर ही शामिल नहीं हुए। विभिन्न सरकारी विभागों के अभियंताओं के साथ उनके परिवार के सदस्यों और पॉलिटेक्निक की छात्राओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इससे कार्यक्रम में युवाओं और परिवारों की भागीदारी भी देखने को मिली।
रक्त को सुरक्षित तरीके से संचित करने के लिए SGPGI, KGMU, सिविल अस्पताल, बलरामपुर अस्पताल और नारायण चैरिटेबल ब्लड सेंटर की मेडिकल टीमें मौजूद रहीं। विशेषज्ञ टीमों की मौजूदगी में रक्तदान कराया गया, ताकि एकत्र किए गए रक्त का इस्तेमाल जरूरतमंद मरीजों के इलाज में किया जा सके।
कार्यक्रम के दौरान महासंघ ने कर्मचारियों से जुड़े कुछ पुराने मुद्दे भी उठाए। लखनऊ मंडल अध्यक्ष राजर्षि त्रिपाठी ने कर्मचारियों के 400 रुपये भत्ते और 4800 ग्रेड पे से जुड़ी पुरानी समस्या का जिक्र करते हुए इन मांगों पर भी ध्यान देने की बात रखी।
यानी एक तरफ यह कार्यक्रम स्वर्गीय आरके दत्त को श्रद्धांजलि और रक्तदान के जरिए समाजसेवा का संदेश देता नजर आया, तो दूसरी तरफ इसके मंच से डिप्लोमा इंजीनियरों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे भी सामने आए।
अब सवाल यही है क्या ऐसी सामाजिक पहल के साथ कर्मचारियों की पुरानी मांगों पर भी सरकार की ओर से जल्द कोई ठोस पहल होगी?
written by :- Vijay Shukla
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