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शंकराचार्य विवाद से गरमाई यूपी की राजनीति: विनय शंकर तिवारी के बयान के बाद बढ़ा सियासी संग्राम !

गोरखपुर के चिल्लूपार के पूर्व विधायक विनय शंकर तिवारी ने पूज्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से सादर मुलाकात की, जिसके बाद उनका बयान प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर गया। मुलाकात के बाद तिवारी ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य और बटुकों का अपमान कर प्रदेश की सरकार ने अपनी मानसिकता दिखा दी है और यह कार्यकाल इतिहास में ब्राह्मणों के अपमान के लिए याद रखा जाएगा।

तिवारी के इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल तेजी से गरमा गया है। उन्होंने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार का रवैया एक खास वर्ग के प्रति असंवेदनशील रहा है। उनके इस आरोप ने विपक्ष को भी सरकार पर हमला करने का मौका दे दिया है।

पूरा विवाद माघ मेले में बटुकों की शिखा खींचने की घटना से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसने धार्मिक भावनाओं को भी प्रभावित किया। इस घटना ने धीरे-धीरे राजनीतिक रूप ले लिया और अब यह मुद्दा प्रदेश स्तर पर बहस का विषय बन चुका है।

इस बीच प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 101 बटुकों का सम्मान कर स्थिति को संतुलित करने की कोशिश की। सरकार की ओर से इसे सम्मान और संवेदनशीलता का संदेश बताया गया, लेकिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इसे दिखावा करार देते हुए तीखा तंज कसा।

उन्होंने कहा, “पहले मारते हो, फिर फूल चढ़ाते हो,” जिससे विवाद और गहरा गया। यह बयान तेजी से चर्चा में आ गया और धार्मिक मुद्दा अब खुलकर राजनीतिक मंच पर आ गया।

इतना ही नहीं, 11 मार्च को लखनऊ कूच का ऐलान भी कर दिया गया है, जिससे आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। यह घोषणा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए डिप्टी सीएम से इस्तीफे की मांग कर दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब तक जिम्मेदारी तय नहीं होगी, तब तक न्याय नहीं माना जाएगा।

विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दे जब राजनीति से जुड़ते हैं तो उनका प्रभाव ज्यादा व्यापक हो जाता है। यही वजह है कि यह मामला अब सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है।

अब सबकी नजर आने वाले दिनों पर टिकी है कि क्या यह विवाद शांत होगा या आंदोलन और राजनीतिक बयानबाजी इसे और बड़ा रूप देंगे। फिलहाल इतना तय है कि इस मुद्दे ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस और टकराव की स्थिति पैदा कर दी है।

written by :- Anjali Mishra

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