मेरठ हत्याकांड का दर्द, जेल में बदल गई जिंदगी मुस्कान, उसकी नवजात राधा और सवालों में उलझा हुआ सच !
मेरठ के चर्चित सौरभ हत्याकांड में आरोपी बनी मुस्कान की जिंदगी अब पूरी तरह बदल चुकी है। जेल की कठोर दीवारों के बीच उसका हर दिन अब एक ही जिम्मेदारी के इर्द–गिर्द घूमता है अपनी नवजात बेटी राधा की देखभाल। 24 नवंबर को जन्मी यह बच्ची मुस्कान के लिए जैसे अंधेरी दुनिया में एक छोटा-सा उजाला है, लेकिन इसके पीछे छिपा दर्द, तनाव और एक अनिश्चित भविष्य लगातार उसके साथ चलता है। पहले जहां मुस्कान पर आरोपों, बयानबाजी और विवादों की परतें थीं, वहीं अब उसके चेहरे पर सिर्फ मातृत्व की चिंता और थकान दिखाई देती है। जेल में वह राधा को गोद में लिए घंटों बैठी रहती है, उसे दूध पिलाती है, सुलाती है और हर वक्त उसके आसपास मंडराती रहती है जैसे यही एक चीज है जो उसे अभी भी इंसान बनाए हुए है।
मुस्कान चाहती है कि उसका प्रेमी साहिल भी इस बच्ची को देख सके। वह बार–बार जेल अधिकारियों से विनती करती है कि साहिल को एक बार राधा को देखने की अनुमति दे दी जाए, लेकिन जेल के सख्त नियमों ने उसकी इस इच्छा को ठंडा जवाब दे दिया। मुलाकातियों की जो सीमाएं हैं, वे इस तरह की विशेष मुलाकात की इजाजत नहीं देतीं। मुस्कान की दुनिया अब इसी उम्मीद और निराशा की लड़ाई में उलझी हुई है। वह चाहती है कि राधा को उसका पिता देखे, लेकिन यह सच भी सबके लिए अभी धुंधला है क्योंकि बच्ची की पहचान को लेकर एक बड़ा सवाल हवा में लटका हुआ है।
सौरभ का परिवार इस बच्ची को स्वीकार करने से पहले उसका DNA टेस्ट कराना चाहता है। उनका कहना है कि जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि राधा वास्तव में सौरभ की बेटी है, तब तक वे कोई संबंध नहीं मान सकते। परिवार का दर्द भी समझ आता है उनके बेटे की मौत के बाद यह बच्ची उनके लिए एक उम्मीद भी हो सकती है और एक गहरे घाव को फिर ताजा करने वाला सच भी। इसलिए वे कानून और विज्ञान की मदद से ही आगे बढ़ना चाहते हैं। उनकी नजर में यह सिर्फ भावनाओं का नहीं, बल्कि न्याय और सच्चाई का सवाल है।
यह पूरा मामला अब एक अलग ही मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां अदालतें, जांच एजेंसियां, पारिवारिक भावनाएं और एक नवजात का भविष्य सब कुछ एक-दूसरे में उलझा हुआ है। जेल में मुस्कान का एक-एक दिन इस फैसले के इंतजार में गुजर रहा है कि राधा किसकी बेटी साबित होगी। कई बार वह अपने सेल में चुपचाप बैठी रहती है और कई बार अपनी बच्ची को सीने से चिपकाकर रो पड़ती है। जेल स्टाफ भी देख रहा है कि वह अब पहले जैसी नहीं रही उसकी जिंदगी अब मातृत्व की जिम्मेदारी और बढ़ती अनिश्चितताओं में बंट चुकी है।
इस बीच, साहिल का रोल भी बड़े सवालों के घेरे में है। वह सामने नहीं आ रहा, बच्ची से मिलने की अनुमति भी नहीं मिली, और आरोपों के बीच उसका अपना पक्ष भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाया। हर किरदार की अपनी कहानी है, अपना दर्द है और अपनी सच्चाई और इन्हीं कहानियों के टकराव ने इस केस को और जटिल बना दिया है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम की असली कीमत एक मासूम बच्ची चुका रही है, जो अभी दुनिया को समझने की उम्र में भी नहीं है। राधा का भविष्य किसके हाथ में जाएगा, कौन उसका परिवार बनेगा, किस पहचान के साथ वह बड़ी होगी इन सबका फैसला अभी अदालत, कानून और DNA रिपोर्ट के हाथ में है। जेल की दीवारों के भीतर मुस्कान अपनी बेटी को सीने से लगाए हर दिन सिर्फ एक ही दुआ करती है कि किसी भी हाल में राधा का जीवन अंधेरे में न डूबे।
कुल मिलाकर, मेरठ का यह मामला सिर्फ एक हत्याकांड नहीं रहा; यह अब एक मां, एक पिता, एक परिवार और एक नवजात की पहचान इन सभी के बीच छिड़ा एक भावनात्मक और कानूनी संघर्ष बन चुका है। और इसी संघर्ष के बीच एक बच्ची की छोटी-सी धड़कनें बड़े-बड़े फैसलों का इंतजार कर रही हैं।
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