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कोरियाई प्रायद्वीप पर जंग के बादल !

कोरियाई प्रायद्वीप में हालात बेहद विस्फोटक हो गए हैं। उत्तर कोरिया द्वारा 10 रॉकेट दागे जाने के बाद दक्षिण कोरिया ने अमेरिका से कड़ा जवाब देने की मांग की है। अमेरिका ने सैन्य समर्थन बढ़ाने के संकेत दिए हैं, वहीं उत्तर कोरिया ने नई चेतावनी जारी की है। ईरान-इज़राइल युद्ध के बीच अब एशिया में भी युद्ध की आहट सुनाई दे रही है। कई देश अपनी सेनाओं को हाई अलर्ट पर रख चुके हैं।

उत्तर कोरिया ने कोरियाई प्रायद्वीप में संयुक्त सैन्य अभ्यास करने और सैन्य साजो-सामान तैनात करने के लिए अमेरिका की कड़ी निंदा की. प्योंगयांग ने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाई किसी भी समय वास्तविक युद्ध में बदल सकती है.  कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) के हवाले से योनहाप ने बताया कि राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय के सूचना कार्यालय के प्रमुख ने एक बयान जारी कर त्रिपक्षीय फ्रीडम शील्ड अभ्यास की निंदा की. इस अभ्यास में दक्षिण कोरिया और जापान शामिल भी थे.

शनिवार को जारी बयान अनुसार, ‘हम अमेरिका और उसके अनुयायियों,(जो कि डीपीआरके के प्रति शत्रुतापूर्ण रुख रखते हैं), को कड़ी चेतावनी देते हैं कि वो अधिक उकसावे और अस्थिरता पैदा करने वाले शत्रुतापूर्ण कृत्यों को तुरंत बंद करें. ये उकसावे वाली कार्रवाइयां कोरियाई प्रायद्वीप और उसके आसपास के क्षेत्र में सैन्य टकराव को वास्तविक सशस्त्र संघर्ष में बदल सकता है.’

दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान ने 15 नवंबर को दक्षिण कोरिया के दक्षिणी द्वीप जेजू के साउथ में अतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में तीन दिवसीय त्रिपक्षीय फ्रीडम एज अभ्यास पूरा किया. सोमवार को 6,000 टन वजनी यूएसएस कोलंबिया ने बुसान में दक्षिण कोरिया के नौसैनिक अड्डे में प्रवेश किया.

उत्तर कोरियाई अधिकारी ने यह भी कहा कि राज्य के सुरक्षा वातावरण की रक्षा करने और क्षेत्र में रणनीतिक स्थिरता और शक्ति संतुलन बनाए रखने के लिए आत्मरक्षात्मक उपाय करना उत्तर कोरिया का संवैधानिक कर्तव्य है.

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