तेल की सप्लाई पर संकट! Middle East तनाव से भारत की बढ़ सकती है टेंशन !
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब के अहम इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों के बीच अब पूरी दुनिया की नजर तेल की सप्लाई पर टिक गई है। चिंता सिर्फ युद्ध या हमलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर पड़ सकता है।
सऊदी अरब दुनिया के बड़े तेल उत्पादकों में शामिल है। ऐसे में अगर उसके तेल उत्पादन, स्टोरेज या एक्सपोर्ट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर लंबे समय तक असर पड़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ सकती है।
सप्लाई में थोड़ी सी भी बड़ी रुकावट का असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। तेल महंगा होने का मतलब है कि पेट्रोल-डीजल, ट्रांसपोर्ट और कई दूसरी चीजों की लागत बढ़ने का दबाव भी बढ़ सकता है।
भारत के लिए यह चिंता और बड़ी है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने पर भारत को तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ सकते हैं।
इसका असर भारतीय रुपये पर भी पड़ सकता है। अगर डॉलर की मांग बढ़ती है और आयात का बिल बढ़ता है, तो रुपये पर दबाव आने की संभावना रहती है।
दूसरी तरफ महंगा तेल महंगाई के लिए भी चुनौती बन सकता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों के अलावा ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, प्लास्टिक, केमिकल और कई दूसरे उत्पादों की लागत पर इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि तेल संकट या महंगाई तुरंत बढ़ ही जाएगी। असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि मध्य-पूर्व का तनाव कितना लंबा चलता है, तेल सप्लाई कितनी प्रभावित होती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें किस स्तर तक जाती हैं।
यानी Middle East का तनाव अब सिर्फ एक क्षेत्रीय भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है। इसका असर तेल से लेकर रुपये और महंगाई तक, भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
written by :- Anjali Mishra
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