UPI शुल्क विवाद: रिपोर्ट अपनाते समय कांग्रेस सांसद थे मौजूद, अब राहुल गांधी के विरोध पर सरकार का सवाल !
UPI को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मामला ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने के फैसले से जुड़ा है। राहुल गांधी ने इस फैसले का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। इसके जवाब में सरकार की ओर से सवाल उठाया गया है कि जिस तरह के रेवेन्यू मॉडल का अब विरोध किया जा रहा है, उससे जुड़ी सिफारिश पर कांग्रेस के कई सांसदों वाली संसदीय समिति पहले ही रिपोर्ट अपना चुकी थी।
दरअसल, संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने 12 अगस्त 2026 को अपनी रिपोर्ट अपनाई थी। रिपोर्ट में UPI इकोसिस्टम के लिए एक टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की जरूरत बताई गई और ज्यादा रकम वाले लेनदेन के लिए चरणबद्ध यानी tiered MDR framework लागू करने की सिफारिश की गई थी।
इस समिति में कांग्रेस के पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ शामिल थे। रिपोर्ट अपनाए जाने के समय ये सभी मौजूद थे और प्रकाशित कार्यवाही में किसी असहमति का उल्लेख नहीं होने की बात रिपोर्टों में सामने आई है। हालांकि, किसी सांसद का समिति में मौजूद होना अपने-आप में रिपोर्ट के हर प्रावधान के व्यक्तिगत समर्थन का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
यहीं से सरकार का सवाल सामने आया है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पूछा कि जब कांग्रेस के सांसदों वाली समिति ने UPI के लिए टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की सिफारिश की थी, तो राहुल गांधी अब इसी तरह की व्यवस्था का विरोध क्यों कर रहे हैं? यह सरकार की ओर से उठाया गया राजनीतिक सवाल है, न कि समिति के प्रत्येक सदस्य की व्यक्तिगत मंशा पर कोई स्थापित तथ्य।
अब राहुल गांधी के रुख की बात करें तो उन्होंने केंद्र के नए MDR नियम का विरोध किया है और इसे ‘UPI टैक्स’ बताते हुए सरकार से फैसला वापस लेने की मांग की है। कांग्रेस का तर्क है कि भले ही शुल्क सीधे व्यापारियों पर लगाया जाए, लेकिन कारोबार की लागत बढ़ने पर उसका असर आगे चलकर ग्राहकों तक पहुंच सकता है। राहुल गांधी ने इस फैसले को लेकर अमेरिकी दबाव का आरोप भी लगाया है, जिसे सरकार और NDA नेताओं ने खारिज किया है।
वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि MDR कोई टैक्स नहीं है और आम ग्राहकों से UPI भुगतान पर MDR वसूलने की अनुमति नहीं होगी। सरकार के अनुसार नया ढांचा मुख्य रूप से मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होगा और छोटे तथा कुछ विशेष श्रेणी के लेनदेन को छूट दी गई है।
नए नियमों के मुताबिक, 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से ज्यादा के कुछ मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹2,000 तक के लेनदेन और व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P भुगतान को इस शुल्क से अलग रखा गया है। कुछ छोटे और ग्रामीण व्यापारियों तथा आवश्यक सेवाओं के लिए भी अलग प्रावधान हैं।
इसलिए पूरा विवाद सिर्फ UPI पर शुल्क लगाने का नहीं है, बल्कि UPI को लंबे समय तक आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने के तरीके और उस लागत का बोझ किस पर पड़ेगा, इस सवाल से भी जुड़ा है। एक तरफ सरकार और संसदीय समिति का तर्क वित्तीय स्थिरता का है, जबकि कांग्रेस इसका संभावित आर्थिक असर और सरकार के फैसले की वजहों पर सवाल उठा रही है। अब इसी पुराने संसदीय रिपोर्ट और मौजूदा सरकारी फैसले के बीच का अंतर राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
written by :- Anjali Mishra
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